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महावीर जन्म कल्याणक इस वर्ष 2026 में 31 मार्च (मंगलवार) को मनाया जा रहा है। उनकी शिक्षाएँ आज के समय में सबसे अधिक प्रासंगिक हैं। हम दुनिया के कई देशों के बीच युद्ध देख रहे हैं, जो न केवल चारों ओर मानवीय संसाधनों को तबाह कर रहा है, बल्कि सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान भी ले रहा है। फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुआ यह युद्ध—जिसमें अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले और फ़ारसी खाड़ी में जवाबी हमले शामिल हैं—के परिणामस्वरूप मार्च 2026 तक वैश्विक, क्षेत्रीय और मानवीय स्तर पर गहरे दुष्प्रभाव सामने आए हैं। इस संघर्ष को एक बड़े 'नकारात्मक आपूर्ति आघात' (negative supply shock) के रूप में वर्णित किया गया है, जिससे भारी मानवीय पीड़ा और आर्थिक व्यवधान उत्पन्न हुआ है। भगवान महावीर स्वामी की युद्ध-विरोधी शिक्षाएँ 'अहिंसा' (अहिंसा) के परम सिद्धांत पर केंद्रित थीं, जिसे उन्होंने सर्वोच्च कर्तव्य (अहिंसा परमो धर्म) घोषित किया था। उन्होंने यह शिक्षा दी कि युद्ध केवल एक राजनीतिक संघर्ष ही नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक विफलता है, जिसके परिणामस्वरूप जीवन का विनाश होता है और नकारात्मक कर्मों का संचय होता है।इस प्रकार, वर्तमान समय मे हम सभी के लिए—महावीर स्वामी की शिक्षाएँ न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया के लिए—अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए, हमारे लिए यह और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम चिंतन करें और यह महसूस करें कि हम उस 'धर्म के मार्ग' से कहाँ भटक गए हैं, जो 24वें जैन तीर्थंकर, भगवान महावीर स्वामी ने मानवता को दिखाया था। भगवान महावीर ने 72 वर्ष की आयु में 'मोक्ष' (जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति) प्राप्त किया। उनका दर्शन 'जैन धर्म' बन गया, जो यह मानता है कि आत्मा में अपने शुद्धिकरण और उपर्युक्त गुणों के अभ्यास द्वारा 'ईश्वर' बनने की अंतर्निहित शक्ति होती है। आत्मा 'परमात्मा' में रूपांतरित हो सकती है। भगवान महावीर ने अहिंसा का प्रचार किया, अर्थात मानवीय आचरण और व्यवहार के सभी रूपों—मानसिक और शारीरिक—में अहिंसा के सिद्धांत का। अहिंसा एक बहुआयामी अवधारणा है, जो इस आधार से प्रेरित है कि सभी जीवित प्राणियों में दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा की एक चिंगारी होती है; इसलिए, किसी अन्य प्राणी को चोट पहुँचाना स्वयं को चोट पहुँचाने के समान है। हमें यह याद रखना होगा कि मानव जाति के समग्र विकास और उसके शांतिपूर्ण अस्तित्व के लिए भगवान महावीर द्वारा दी गई अहिंसा की शिक्षा कितनी अनिवार्य है। इसकी कमी... इसका न मानना..मानवता को भारी पड़ रहा है। पीयूष कांत जैन, Aadvocate पूर्व: अतिरिक्त महाधिवक्ता, पंजाब।