Uturn Time
Breaking
Chandigarh: भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण वर्ग चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न पश्चिम बंगाल में जनादेश 2026- सत्ता का नया सवेरा -9 मई 2026 रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती: नई सरकार का शपथ ग्रहण -कई गंभीर चुनौतियां Testing Agin Zirakpur: तेज आंधी ने बढ़ाया खतरा, हाईवे पर उड़ती शीट से हड़कंप Zirakpur: बलटाना में लगातार वारदातें, बुजुर्ग से छीनी सोने की चेन zirakpur: युवक-युवती और दुकानदार में झड़प, शिवालिक विहार में माहौल तनावपूर्ण Chandigarh: कारोबारियों के लिए राहत, राइट टू बिजनेस मॉडल पर काम शुरू Chandigarh: चंडीगढ़ घटना पर कानूनी जंग तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूटी प्रशासन Ghaziabad: लुधियाना से CS हरदीप सिंह ने गाज़ियाबाद कार्यशाला में लिया भाग Chandigarh: मान सरकार पर हमले तेज, जाखड़ ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात Panchkula: वार्ड-7 बना चुनावी हॉटस्पॉट, प्रेम कुमार ने झोंकी पूरी ताकत Panchkula: तीन शहरों के लिए जीवनदान, पंचकूला में बना ग्रीन कॉरिडोर
Logo
Uturn Time
पावर टू सेव ह्यूमन राइट्स के प्रधान इंजीनियर परमजीत सिंह भारज द्वारा केंद्र सरकार के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को, डिप्टी कमिश्नर लुधियाना के माध्यम से, एक गंभीर शिकायत जनहित में भेजी गई है। इस शिकायत में देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं के साथ हो रही नाइंसाफी और उनके कानूनी अधिकारों के उल्लंघन की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। प्रेस को जारी बयान में उन्होंने कहा कि देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां जैसे जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया द्वारा 5G और उच्च गति वाली इंटरनेट सेवाओं के बड़े-बड़े दावे करके उपभोक्ताओं से महंगी राशि वसूली जा रही है, लेकिन वास्तविकता में न तो उन्हें वादे के अनुसार स्पीड मिल रही है और न ही मानक के अनुरूप सेवा प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि बिना पर्याप्त टावर और नेटवर्क क्षमता के नए सिम कार्ड और कनेक्शन जारी करना सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है, जिससे एक ही टावर पर अत्यधिक भार पड़ जाता है और इंटरनेट की गति बहुत कम हो जाती है। उपभोक्ताओं द्वारा की गई शिकायतों पर कंपनियों की ओर से हमेशा एक ही जवाब दिया जाता है कि “ज्यादा यूजर होने के कारण स्पीड कम है और अपग्रेडेशन का काम चल रहा है”, जो कि वर्षों से दोहराया जा रहा है। यह व्यवहार स्पष्ट रूप से गलत प्रस्तुति की श्रेणी में आता है। इंजीनियर भारज ने कहा कि यह मामला भारत के कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत सेवा में आता है। इसके अलावा, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया एक्ट, 1997 के अनुसार टेलीकॉम सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। उपभोक्ताओं को वादे के अनुसार सेवा न देना एक कानूनी उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि सूचना का अधिकार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आधुनिक युग में एक बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है, और कम गुणवत्ता वाली सेवा के बावजूद पूरी राशि वसूलना नैतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टि से गलत है। संस्था ने मांग की है कि प्रत्येक क्षेत्र के लिए टेलीकॉम कंपनियों की अधिकतम उपभोक्ता सीमा कानूनी रूप से निर्धारित की जाए। जब तक पूरा नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार न हो, तब तक उस क्षेत्र में नए सिम और प्लान की बिक्री पर रोक लगाई जाए। 5G सेवाओं के लिए न्यूनतम कानूनी स्पीड मानक तय किया जाए। अंत में इंजीनियर परमजीत सिंह भारज ने भावुक अपील करते हुए कहा कि आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई से सेवाएं खरीदता है और उसे बदले में न्यायपूर्ण और मानक के अनुरूप सेवा मिलनी चाहिए। यदि इस मामले पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो संस्था अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होगी।