링크모음스포츠중계주소야주소킹링크모음주소야주소모음주소콘여기여bulk Ahrefs DR checker주소킹여기여주소모음아이러브밤여기여주소모음링크모음casibombetciocasibomcasibomcasibom girişcasibomcasibom telegramgrandpashabet 8255holiganbet 7672holiganbet 7672grandpashabet 8255grandpashabet 8254holiganbet 7673jojobet 8232holiganbet 7673jojobet 8233jojobet 8233casibomHacklink Satın AlHacklink Satin alcasibomcasibom링크모음주소모음링크모음hacklink : linkforge.ccBacklink : https://linkforge.cc/Backlink : https://linkforge.cc/Buy Backlink : https://linkforge.cc/주소가자주소온길토토사이트주소온길주소온길주소온길주소온길주소모음주소모음링크모음주소모음주소온길토토사이트먹튀검증슬롯사이트토토사이트주소모음링크모음주소모음주소모음주소모음링크모음토토사이트토토사이트토토사이트토토사이트토토사이트먹튀검증커뮤니티주소온길주소온길주소모음주소모음링크모음주소모음링크모음주소모음링크모음주소모음링크모음주소모음링크모음링크모음주소모음링크모음토토사이트토토사이트토토사이트토토사이트토토사이트토토사이트토토사이트토토사이트토토사이트토토사이트주소모음주소가자토토사이트토토솔루션카지노솔루션토토솔루션카지노솔루션토토솔루션먹튀검증먹튀검증 커뮤니티먹튀검증먹튀검증 커뮤니티주소온길링크모음주소모음링크모음주소온길주소모음주소타임주소모음 링크모음주소모음주소모음링크모음주소모음주소모음주소모음주소모음링크모음링크모음주소모음주소모음링크모음토토솔루션주소모음링크모음링크모음토토솔루션카지노솔루션주소모음링크모음주소모음주소모음링크모음주소모음링크모음토토사이트토토사이트주소모음링크모음토토사이트토토사이트링크모음링크모음링크모음링크모음주소모음사이트모음카지노솔루션주소모음주소모음링크모음주소가자주소모음링크모음주소모음주소모음링크모음주소모음주소모음링크모음주소가자링크모음주소모음주소모음주소모음주소모음주소모음링크모음주소모음주소모음주소모음
स निर्मल सिंह विर्क की क़लम से - Uturn Time
Uturn Time
Breaking
New Delhi: दिल्ली जल बोर्ड टेंडर मामले में सत्येंद्र जैन गिरफ्तार, पूर्व CEO समेत 6 पर ACB की कार्रवाई; मनी ट्रेल की जांच तेज Panipat: चंडीगढ़ में संसदीय राजभाषा उप-समिति का दो दिवसीय निरीक्षण, 12 शहरों के 84 कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग की समीक्षा Amritsar: फिरोजपुर मंडल के 38 सेवानिवृत्त रेलकर्मियों को मिले ₹20.47 करोड़ से अधिक, डीआरएम संजीव कुमार ने सौंपे भुगतान Kurukshetra: लिव-इन और प्रेम विवाह समेत सामाजिक मुद्दों पर खाप प्रतिनिधियों ने सीएम सैनी से की मुलाकात, 22 अगस्त को कुरुक्षेत्र में फिर होगा मंथन Ludhiana: विश्व फोटोग्राफी दिवस पर लुधियाना में दिखेगा बदलते शहर का आईना, 10वीं वार्षिक फोटो प्रदर्शनी ‘वन थाउज़ेंड वर्ड्स’ आज से Ludhiana: ग्लैम अप सैलून ने होटल पैराडाइज़ ड्रीम में मनाया तीज का पर्व, पंजाबी रंग में रंगा समारोह Amritsar: अमृतसर में वर्ल्ड सिख मिलिट्री शहीद यादगारी कमेटी इटली के सदस्य मनजिंदर सिंह का सम्मान Chandigarh: पंजाब में ट्रांसफर-पोस्टिंग नेटवर्क की ED जांच का दायरा बढ़ा, चैट्स में टेंडर, हथियार लाइसेंस और जमीन सौदों के भी दावे Chandigarh: 14 देशों के विद्यार्थियों से सीएम सैनी ने किया संवाद, बोले- ‘गो ग्लोबल’ सोच के साथ आगे बढ़ें युवा Chandigarh: हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की छुट्टी पर सख्ती, कैजुअल लीव के लिए भी पूर्व मंजूरी अनिवार्य Ludhiana: DMC&H कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी में नए सत्र से 50 विद्यार्थियों को मिलेगा दाखिला, आधुनिक सुविधाओं से होगी पढ़ाई Ludhiana: CICU के ‘सेल्स ऑन स्टेरॉयड लाइव!’ में 200 से अधिक उद्यमियों ने सीखी बिक्री बढ़ाने की रणनीतियां
Logo
Uturn Time
पंजाब/यूटर्न/1 अप्रैल। रिमांड शब्द से अभिप्राय मारपीट से नहीं है जैसा कि आम बोलचाल की भाषा में प्रचलन है। रिमांड अवधि के दौरान गिरफ्तार किए गए व्यक्ति से पूछताछ मात्र है , पर रिमांड अवधि के दौरान कुछ प्राधिकारी लोग मारपीट कर सूचना उगलवाने की कोशिश करते हैं, हालांकि संवैधानिक तौर पर मारपीट करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है । भारतीय संविधान ने प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता से जीने का अधिकार दिया है, एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने का सीधा अर्थ यह है कि उसे उसकी स्वतंत्रता से वंचित करना। किसी भी स्तर पर आपराधिक मामले होने पर प्रायः पुलिस मारपीट करती है। कई बार टॉर्चर से पुलिस हिरासत में मौत भी हो जाती है। ऐसी घटनाएं आमतौर पर देश के किसी न किसी कौन में घटती ही रहती है । रिमांड अवधि के दौरान अधिकारी द्वारा केवल पूछताछ करना होता है , न कि इसका मतलब मारपीट से होता है, पर कुछ प्राधिकारी लोग स्वयं का रिस्क लेकर रिमांड अवधि के दौरान गिरफ्तार किए गए व्यक्ति आतंकित कर या धमकियां देकर जबरन अपराध स्वीकार कराने की कोशिश करते हैं, ऐसे में मारपीट की वजह से पीड़ा ने सहते हुए व्यक्ति की मौत हो जाती हैं। जिससे मृत्तक व्यक्ति के परिवार को वालों को भी बड़ी मुश्किलातों का सामना करना पड़ता है । मृतक के परिवार को दिया गया दर्द मानसिक बीमारी के रूप में पनप लेता है । जिससे शरीर को हानि हो जाती है। हालांकि कि ऐसा नहीं है कि मृतक व्यक्ति की मौत की आंच पुलिस प्राधिकारियों तक नही पहुंचती। वे भी एक नये किस्म के अपराध में शामिल हो जाते हैं। जिसका सीधा असर उनके परिवार आर्थिक और मानसिक तौर पर पड़ता है। पुलिस जितनी भी निष्पक्ष जांच कर ले , पर प्राधिकारी लोग अपने ही साथी लोगों की ही फेवर की बात करते हैं । ऐसे में मृत्यु होने पर न तो न्यायालय पालिका अपनी जिम्मेदारी लेती है, और न ही वह डॉक्टर जो हर 6 घंटे पर गिरफ्तार व्यक्ति का मेडिकल करता है। वास्तव में प्राधिकारी गिरफ्तार किया व्यक्ति को मारपीट का इतना डरा देते हैं कि वह मेडिकल डॉक्टर के सामने कुछ भी बोल नहीं पाता । और न ही डॉक्टर उसके किसी भी प्रकार से शरीर के निशान को चेक करते हैं , सिर्फ गिरफ्तार व्यक्ति का फिट होने का प्रमाण दे देते हैं , ऐसे में डॉक्टर भी अपनी जिम्मेदारी से बच निकलता है । अब यह देखना है कि मानवाधिकार क्या कहता है कि मेरा कार्य वहां से शुरू होता है जहां से शोषण आरंभ होता है। मानव समिति का कार्य तब शुरू होता है, जब उत्पीड़न संबंधी घटना घट चुकी होती है । इनका कार्य घटना स्थल का दौरा करना , मृत्यु कैसे हुई , रिपोर्ट प्राप्त करना और समिति को दी हुई शक्ति का प्रयोग करके अपने स्तर पर सरकार को रिपोर्ट पेश करना व सिफारिश करना इत्यादि शामिल हैं। अब सवाल यह उठता है कि बड़े-बड़े यूरोपीय विकसित देशों में भी संगीन किस्म के अपराध होते हैं , वहां पर भी अपराधी अपना अपराध स्वीकार करता है, उन देशों में भारत की तरह टार्चर से मौतें नहीं होती , उन देशों में मानवाधिकार के सार्वभौमिक घोषणा पत्र ,1948 का कड़ाई से पालन होता है । भारत देश में किसी न किसी हिस्से में ऐसे ही प्रायः मौतें होती रहती हैं और किसी गैर जिम्मेदाराना व्यवहार या अनदेखी के कारण होती है, इसी कारण से भारत में मानव अधिकारों की आलोचना होती है । अब स्थिति यह बनती है, कि मौत के अंतराल के समापन के लिए बीच में एक और तृतीय पक्ष की आवश्यकता महसूस हो जाती है , न्यायपालिका , डॉक्टर , पुलिस , समाज या संगठन के बुद्धिजीवी लोग और पूर्ण शक्तियों के साथ अन्य नया पक्ष, यानी एक प्रकार से जिला सत्र पर सीधे गैर सरकारी संगठन की मांग ,यह जरूरी नहीं है, कि मानव समाज के सभी कार्य पैसे के लिए ही हो , एक सभ्य मानव होने के नाते भी समाज के कल्याण के लिए कार्य किए जा सकते हैं जिला स्तर पर गैर सरकारी संगठन का कार्य रिमांड अवधि के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति को भय मुक्त वातावरण प्रदान करना , नियमानुसार हर 6 घंटे पर मेडिकल अपने सामने करवाना , मेडिकल के समय पुरुष को दूरी बनाए रखने के लिए कहना, गलत प्राधिकरण का तबादला करने की पावर होना , गिरफ्तार व्यक्ति के शरीर के चोट निशान को देखना , पैरों , पीठ व शरीर पर चोट के निशान देखना , गिरफ्तार व्यक्ति को कम से कम 50 मीटर की दूरी तक पैदल चलवा कर देखना और मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र के साथ गैर सरकारी संगठनों के हस्ताक्षर इत्यादि करना यही समय की मांग है। इस तरह मानवाधिकारों के वायोलेशन फेस होने पर , एड्रेस और सोल्यूशन कर सकते हैं। जिससे पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों पर अंकुश लगाया जा सकता है।