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चंडीगढ़। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही शहर में निजी स्कूलों की किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर अभिभावकों की परेशानियां बढ़ गई हैं। आरोप है कि कई प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूल अभिभावकों को केवल तय दुकानों से ही कॉपी-किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिससे उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। शहर के 75 से अधिक निजी स्कूलों में सत्र की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन किताबों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी सामने आ रही है। सेक्टर-19, 22 और आसपास के इलाकों में स्थित दुकानों पर अभिभावकों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि घंटों लाइन में लगने के बावजूद उन्हें सभी कक्षाओं की किताबें एक ही स्थान पर उपलब्ध नहीं हो पा रहीं, जिससे उन्हें बार-बार दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किताबों की बढ़ती कीमतें भी अभिभावकों के लिए बड़ी चिंता बन गई हैं। पहली कक्षा की किताबों का सेट 3500 से 4700 रुपये तक बिक रहा है, जबकि चौथी से सातवीं कक्षा तक यह खर्च 5000 से 9000 रुपये तक पहुंच गया है। अभिभावकों का आरोप है कि हर साल नए एडिशन के नाम पर किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जबकि पुराने एडिशन सस्ते में उपलब्ध हो सकते हैं। स्थानीय दुकानदारों का भी कहना है कि वे कम कीमत पर किताबें उपलब्ध कराने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें सप्लाई नहीं दी जाती। वहीं, अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन नहीं हो रहा। अभिभावकों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस मामले में सख्ती बरती जाए, स्कूलों को एक से अधिक दुकानों से किताबें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं और खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हो सके।