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चंडीगढ़ : पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार के एक ठेका कर्मचारी को बड़ी राहत देते हुए 53,604 रुपये की रिकवरी के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी नीति के तहत और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से किए गए भुगतान की बाद में वसूली नहीं की जा सकती, जब तक कर्मचारी की ओर से कोई धोखाधड़ी या गलत जानकारी न दी गई हो। यह फैसला कैथल निवासी दीपक कुमार की याचिका पर जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने सुनाया। याचिकाकर्ता वर्ष 2012 से जल एवं स्वच्छता सहयोग संगठन के अंतर्गत जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में संविदा आधार पर जिला सूचना, शिक्षा एवं संचार तथा समानता सलाहकार के रूप में कार्यरत है। मामले के अनुसार, मई 2023 में तत्कालीन सरकारी निर्देशों के तहत दीपक कुमार को एलटीसी के बदले एक माह का वेतन, कुल 53,604 रुपये दिए गए थे। यह भुगतान विभागीय प्रक्रिया पूरी करने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी किया गया था। हालांकि, करीब डेढ़ साल बाद सितंबर 2024 में विभाग ने नए निर्देशों का हवाला देते हुए इस राशि की रिकवरी के आदेश जारी कर दिए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि नए नियमों को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं किया जा सकता। जिस समय भुगतान किया गया, उस समय वह पूरी तरह वैध था, इसलिए बाद में नीति बदलने के आधार पर राशि की वसूली करना कानूनन सही नहीं है। अदालत के इस फैसले को ठेका कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट संदेश गया है कि वैध तरीके से किए गए भुगतान की मनमानी रिकवरी नहीं की जा सकती।