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इलाज के लिए दर-दर भटक रहा परिवार, सरकार के दावे निकले खोखले ​-चरणजीत सिंह चन्न- जगरांव/यूटर्न/14/अप्रैल। वृंदावन के यमुना नदी में हुए नाव हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि अब जीवित बचे पीड़ितों की दुर्दशा ने सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जगरांव के शास्त्री नगर की रहने वाली रेखा जैन इस हादसे में चमत्कारिक रूप से बच तो गईं, लेकिन अब वे मौत और जिंदगी के बीच जंग लड़ रही हैं। विडंबना देखिए कि जिन नेताओं ने इलाज के बड़े-बड़े दावे किए थे, उनकी चुप्पी अब 'मगरमच्छ के आंसू' साबित हो रही है। ​कोमा में पीड़िता: PGI में नहीं मिला इलाज, अब निजी अस्पताल का सहारा ​हादसे के बाद रेखा जैन को रेस्क्यू कर मथुरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। रेखा के बेटे ने सोशल मीडिया पर दर्द साझा करते हुए बताया कि PGI में उनकी मां को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। मजबूर होकर परिवार को उन्हें लुधियाना के एक निजी अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ा। ​बड़ा सवाल: मथुरा से 150 KM दूर 'AIIMS दिल्ली' क्यों नहीं भेजा? ​सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। चर्चा है कि जब रेखा की हालत नाजुक थी, तो उन्हें मथुरा से 400 किलोमीटर दूर चंडीगढ़ क्यों भेजा गया? जबकि केवल 150-200 किलोमीटर की दूरी पर दिल्ली का AIIMS था, जहाँ विश्व स्तरीय सुविधाएं मौजूद हैं। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं है? ​सरकार की चुप्पी से नाराजगी मुख्यमंत्री के दावों की हवा निकल गई है। परिजनों का आरोप है कि: ​विधायक ने सांत्वना के दो शब्द तक नहीं कहे। ​किसी अधिकारी की ड्यूटी नहीं लगाई गई। ​न ही डॉक्टरों से इलाज के फीडबैक के लिए कोई फोन किया गया। ​"ऐसे समय में जब मरीज को दुआओं और परिवार को साथ की जरूरत है, तब सरकार सो रही है। हम जगरांव वासी परिवार के साथ खड़े हैं। विशाल शर्मा (प्रधान, कर भला हो भला संस्था) व गोपी शर्मा समाजसेवी। हादसों के बाद मुआवजे और मुफ्त इलाज के ऐलान करना आसान है, लेकिन धरातल पर एक पीड़ित परिवार को सिस्टम की 'खज्जल-खुवारी' (धक्के) से बचाना ही असली सेवा है। क्या सरकार अब भी जागेगी?