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ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) में मंगलवार को उस समय हलचल मच गई, जब मोहाली कोर्ट के वारंट ऑफिसर एस्टेट ऑफिसर (ईओ) के कार्यालय और सरकारी गाड़ी को कुर्क करने पहुंचे। कुर्की की प्रक्रिया शुरू होते ही गमाडा अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पीड़ित को मुआवजे की राशि का चेक सौंप दिया। जानकारी के अनुसार, मोहाली की परमानेंट लोक अदालत ने पहले ही पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाते हुए गमाडा को मुआवजा देने के आदेश दिए थे, लेकिन आदेश के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद अदालत की चेयरपर्सन गुरमीत कौर ने ईओ कार्यालय में मौजूद एसी, पंखे, कुर्सियां, टेबल, कंप्यूटर, एलईडी, कैश और सरकारी वाहन तक कुर्क करने के निर्देश जारी किए थे। शिकायतकर्ता फेज-10 निवासी जंग बहादुर सिंह के वकील जतिन सैनी ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने पर गमाडा की सीएम साक्षी साहनी ने कहा कि उन्हें अदालत के आदेश की जानकारी नहीं थी। इसके बाद संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और तुरंत मुआवजा राशि जारी करने के निर्देश दिए गए। इस दौरान गमाडा के एस्टेट ऑफिसर वरुण कुमार ने मामले में देरी पर पीड़ित परिवार से माफी भी मांगी। क्या था मामला? फेज-10 निवासी जंग बहादुर सिंह ने वर्ष 2016 में गमाडा की एरोसिटी परियोजना में प्लॉट खरीदा था। प्लॉट अलॉट होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। इसके बाद उन्होंने परमानेंट लोक अदालत में शिकायत दायर की। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने गमाडा को दोषी मानते हुए ₹1.25 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया था। आदेश का पालन न होने पर शिकायतकर्ता ने एक्सीक्यूशन याचिका दायर की, जिसके बाद अदालत ने गमाडा कार्यालय और वाहन की कुर्की के आदेश जारी किए।