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पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए बेअदबी कानून को लेकर विवाद गहराता जा रहा है और यह मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। जालंधर निवासी सिमरनजीत सिंह ने इस कानून को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने तर्क दिया है कि यह कानून संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ है और केवल एक धर्म विशेष से जुड़ा होने के कारण असंवैधानिक प्रतीत होता है। साथ ही उन्होंने संविधान की धारा 254 का हवाला देते हुए कहा कि जब राज्य का कानून केंद्र के कानून से टकराता है, तो उसे लागू करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। याची ने यह भी सवाल उठाया है कि पंजाब सरकार ने राज्यपाल की मंजूरी लेकर 20 अप्रैल 2026 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया, जबकि इसमें शामिल प्रावधान बेहद कठोर हैं, जिनमें बेअदबी साबित होने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और 5 लाख से 25 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान शामिल है। कानून में यह भी कहा गया है कि हर वह व्यक्ति “कस्टोडियन” माना जाएगा जिसके पास श्री गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप है और बेअदबी की स्थिति में उसे तुरंत पुलिस को सूचना देनी होगी। इसके अलावा जांच प्रक्रिया को भी सख्त बनाया गया है, जिसमें DSP रैंक से नीचे अधिकारी जांच नहीं कर सकेगा, 60 से 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल करनी होगी और डिजिटल सबूतों जैसे CCTV, सोशल मीडिया, कॉल रिकॉर्ड और अन्य फॉरेंसिक जांच को भी शामिल किया जाएगा। याची ने इन सभी प्रावधानों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है और खुद इस मामले की पैरवी करने की बात कही है, जिससे यह मामला अब कानूनी और संवैधानिक बहस का बड़ा विषय बन गया है।