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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू करते हुए करीब 32 हजार मकानों को नोटिस जारी किए हैं। यह कदम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद उठाया गया है, जिससे पूरे शहर में हलचल मच गई है। अधिकारियों के अनुसार जिन मकानों में स्वीकृत नक्शे से हटकर निर्माण किया गया है जैसे अतिरिक्त कमरे, छत पर ढांचे, बालकनी या संरचना में बदलाव उन्हें चिन्हित कर नोटिस भेजे गए हैं। कई जगहों पर खंभों और दीवारों में बदलाव को सुरक्षा के लिए खतरा भी माना गया है। सेक्टरों में शुरू हुई कार्रवाई अभियान के तहत सेक्टर-41 और सेक्टर-45 में कुछ अवैध ढांचे पहले ही हटाए जा चुके हैं। अब सेक्टर-29 और सेक्टर-30 के मकानों को नोटिस जारी होने के बाद स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ गई है। खुद हटाएं उल्लंघन, नहीं तो होगी कार्रवाई हाउसिंग बोर्ड ने अलॉटियों को चेतावनी दी है कि वे स्वयं अवैध निर्माण हटाकर भवन की मूल संरचना बहाल करें। साथ ही स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट जमा करना भी अनिवार्य किया गया है, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट के पुराने आदेशों का असर हाई कोर्ट ने पहले भी असुरक्षित इमारतों की जांच और सुधार को लेकर सख्त निर्देश दिए थे। इन्हीं आदेशों के आधार पर अब प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है, ताकि शहर में भवन नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। विरोध और सियासत भी तेज हाल ही में सेक्टर-45 में कार्रवाई के दौरान लोगों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी, जिसके बाद मामला और गरमा गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। वहीं सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि मकान तोड़ना स्थायी समाधान नहीं है और जरूरत के मुताबिक किए गए बदलावों को नियमित करने के लिए नीति बनाई जानी चाहिए। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों ने भी ‘वन टाइम सेटलमेंट’ की मांग उठाई है। चुनावी साल में बढ़ी हलचल नगर निगम चुनाव नजदीक होने के चलते यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। एक तरफ प्रशासन सख्ती दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ लोग राहत की उम्मीद में सरकार की ओर देख रहे हैं।