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पंजाब में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और चरमराई आपूर्ति व्यवस्था के विरोध में शिरोमणि अकाली दल ने आज प्रदेश सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं ने बिजली बोर्ड के एक्सीयन (XEN) कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। ​प्रमुख वक्ताओं के तीखे तेवर: ​एस.आर. कलेर (हल्का इंचार्ज): "पंजाब में बिजली प्रबंधन पूरी तरह फेल हो चुका है। लंबी कटौती के कारण किसानों के ट्यूबवेल बंद हैं, जिससे फसलें सूख रही हैं। सरकार आंखें मूंदकर बैठी है और उसे किसानों के दर्द का कोई अहसास नहीं है।" ​गुरचरण सिंह ग्रेवाल (SGPC सदस्य): "बिजली की किल्लत ने छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की कमर तोड़ दी है। इस भीषण गर्मी में कारोबार ठप हो रहे हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।" ​शिवराज सिंह पूर्व सरपंच: "बिजली कटौती की सबसे ज्यादा मार मजदूर वर्ग पर पड़ रही है। फैक्ट्रियों और उद्योगों में काम रुकने के कारण दिहाड़ीदारों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।" ​जन-जीवन पर बुरा असर:- ​धरने के दौरान नेताओं ने सरकार को घेरते हुए कहा कि बिजली कटौती से न केवल खेती और व्यापार, बल्कि आम घरेलू जीवन भी बुरी तरह प्रभावित है: ​बच्चों की पढ़ाई में बाधा आ रही है। ​पीने के पानी की सप्लाई ठप हो रही है। ​भीषण गर्मी में घरेलू कामकाज करना दूभर हो गया है। ​बड़े संघर्ष की चेतावनी:- ​चंद सिंह डल्ला, कमलजीत सिंह मल्ला और दीदार सिंह मलक ने संयुक्त रूप से चेतावनी दी कि बिजली विभाग तुरंत बिजली आपूर्ति का पक्का शेड्यूल जारी करे। उन्होंने कहा कि यदि बिना कारण लग रहे कट बंद नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में इस संघर्ष को और तेज किया जाएगा और राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। ​इस रोष प्रदर्शन में दविंदरजीत सिंह सिद्धू, परमिंदर सिंह चीमा, मनदीप सिंह गालिब, कुलदीप सिंह गिद्दरविंडी, रेशम सिंह माणूंके (SC विंग), गुरप्रीत सिंह बसुवाल (IT विंग), संदीप सिंह मल्ला, सुखू जगरांव और अन्य कई सर्कल प्रधान व गांवों के गणमान्य अकाली नेता बड़ी संख्या में उपस्थित थे। ​निष्कर्ष: अकाली दल ने स्पष्ट किया है कि वे जनता की समस्याओं के लिए चुप नहीं बैठेंगे और बिजली संकट के समाधान तक लड़ाई जारी रखेंगे।