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"धोखाधड़ी का भारी असर, 11 दुकानदारों पर फिर कुर्की का खतरा"
डेराबस्सी: डेराबस्सी हलके में करोड़ों की ठगी के आरोप में विदेश फरार बिल्डर की कंपनी जीबीपी के इको ग्रींस–2 में धोखाधड़ी के शिकार हुए 11 दुकानों के मालिकों पर फिर कुर्की की तलवार लटक गई है। बिल्डर के लोगों उन्हीं दुकानों पर करीब एक करोड़ रु का लोन डकार लिया जो वह पहले बेच चुका था जबकि बैंक रिकवरी के नोटिस दुकानदारों को भेज रहा है जिसमें 14 मई तक दुकानें खाली की डेडलाइन दी गई है। खाली न करने पर पुलिस प्रशासन बनती कार्रवाई करेगा। दो साल में तीसरी बार जारी हुए कब्जा वारंट ने दुकानमालिकों का दिन का चैन व रातों की नींद उड़ा दी है जबकि उनके पास दुकानों की रजिस्ट्री, इंतकाल व भारमुक्त तक मौजूद हैं। इस धोखाधड़ी के शिकार बने मासूम लोगों की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हताशा में बदल रही मायूसी के चलते इंसाफ की बाट जोह रहे दुकानमालिकों ने सीएम विंडो पर खबरों समेत शिकायत भेज इंसाफ की गुहार लगाई है, वहीं धोखाधड़ी के आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई कर उन्हें इंसाफ दिलाने की मांग की है। दुकान मालिकों द्वारा पेश दस्तावेजों मुताबिक गौरव पुत्र चमन लाल वासी मुबारकपुर ने गुलाबगढ़ मौजे में 2295 वर्ग फीट जमीन की रजिस्ट्री जीबीपी के रिश्तेदार अजय गुप्ता पुत्र प्रेमचंद वासी यमुनानगर को करवा दी। 6 जनवरी 2017 को रजिस्ट्री के दो हफ्ते बाद खरीदार अजय गुप्ता ने अपनी फर्म अजय ट्रेडिंग कंपनी के नाम 20 जनवरी को इंडियन बैंक से लाखों का लोन डकार लिया जो बढ़कर 1 करोड़ 15 लाख पहुंच गया है। अजय ने जीपीए गौरव के नाम भी करवा दी। जमीन मालिक ने अलग से 11 बिल्टअप दुकानें भी बेच दी और उसी जमीन पर बैंक से लोन भी डकार लिया । लोन अदायगी में बैंक डिफाल्टर हुए बिल्डर की रिकवरी बैंक दुकानें बेचकर करने जा रहा है। माल विभाग में मिलीभगत से दोहरी ठगी: एक प्रकार से यह दोहरी ठगी है। लोन के बावजूद पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी देने वाला और लेने वाला, दोनों 3 साल तक ये बनी बनाई दुकानें बेचते रहे जबकि किसी फर्द और भार मुक्त सर्टिफिकेट समेत माल विभाग के रिकार्ड में इस लोन का जिक्र नहीं आया। यह काम माल विभाग के अधिकारियों और कर्मियों की मिलीभगत के बगैर संभव ही नहीं है। इस गोरख धंधे का खामियाजा वे लोग भुगत रहे हैं जिन्होंने अपनी सारी उम्र की जमा पूंजी लगाकर यह दुकानें खरीदी थी। सितंबर, 2024 में कुर्की के आर्डर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 21 जून को जारी किए जा चुके थे। इंडियन बैंक के पक्ष में अजय ट्रेडिंग कंपनी डेराबस्सी से कब्जा लेने के आर्डर हैं। तब लोन 95 लाख का था जो बढ़कर 1.15 का हो गया। इसके विरोध में पीड़ित दुकानदार माल विभाग के पास पहुंचे। शिकायत देकर फर्जीवाड़े की जांच की मांग की। कुर्की जरुर रुक गई और विदेश में बैठे गौरव ने बैंक से सेटलमेंट कर 11 रु जमा कराने पर लोन 1.04 करोड़ का रह गया। गौरव ने आगे कोई किश्त नहीं दी। उधर, परंतु माल विभाग ने साल बाद भी जांच पूरी ही नहीं की। सवाल है कि गौरव द्वारा सेटलमेंट फेल होने पर बैंक ने फिर असली मालिकों पर कुर्की की तलवार लटका दी है। दूसरी ओर, थाना प्रभारी सुमित मोर के अनुसार उनसे कब्जे पुलिस प्रोटेक्शन समेत मदद के लिए अभी किसी प्रकार का कोई नोटिस नहीं आया है।