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ज़ीरकपुर 11 Jan : बलटाना क्षेत्र में बने फ्लाईओवर के नीचे ट्रैफिक व्यवस्था दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। हाल ही में सामने आई तस्वीरें साफ तौर पर यह साबित करती हैं कि फ्लाईओवर के नीचे का इलाका पूरी तरह अव्यवस्थित ट्रैफिक का केंद्र बन चुका है, जहां हर पल हादसे का खतरा बना रहता है। हैरानी की बात यह है कि फ्लाईओवर बने हुए छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक यहां न तो ट्रैफिक लाइट लगाई गई है और न ही किसी प्रकार के ट्रैफिक साइन बोर्ड या रोड मार्किंग की व्यवस्था की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कट पॉइंट पर वाहन चालकों को किसी भी तरह की दिशा या नियमों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती। नतीजतन, चारों दिशाओं से वाहन बिना किसी नियंत्रण के आ-जा रहे हैं। दोपहिया, चारपहिया, ऑटो और साइकिल सवार एक साथ कट मारते नजर आते हैं, जिससे आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। कई लोगों को पहले भी इन दुर्घटनाओं में चोटें लग चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह चौराहा बेहद संवेदनशील बन चुका है। यहां रॉन्ग साइड वाहनों की आवाजाही आम बात हो गई है, जिससे टकराव की आशंका हर समय बनी रहती है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में हालात और भी खराब हो जाते हैं। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते यहां ट्रैफिक लाइट, स्पष्ट रोड मार्किंग, साइन बोर्ड और पुलिस की नियमित निगरानी नहीं की गई, तो किसी दिन यह स्थान बड़े और जानलेवा हादसे का गवाह बन सकता है। इस पूरे मामले में स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि केवल फ्लाईओवर का निर्माण कर देना ही पर्याप्त नहीं है। उसके नीचे की ट्रैफिक प्लानिंग और सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होती है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में होने वाले किसी भी बड़े हादसे की जिम्मेदारी पूरी तरह संबंधित विभागों और प्रशासन की होगी। कोटस “इस सप्ताह के भीतर दोनों तरफ दिशा-सूचक बोर्ड लगा दिए जाएंगे, ताकि राहगीरों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।” — राहुल सोलख, मैनेजर, एनएचएआई