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पंजाब में बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव, केबल भूमिगत होंगी
चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब गांवों में बिजली की ओवरहेड तारों को हटाकर भूमिगत केबलिंग की जाएगी। भगवंत मान ने मंगलवार को अपने पैतृक गांव सतौज में बिजली तारों को भूमिगत करने (अंडरग्राउंड केबलिंग) परियोजना का शिलान्यास किया। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत सतौज गांव में 384 बिजली के खंभे हटाए जाएंगे और सड़कें खोदे बिना जमीन के अंदर केबल बिछाई जाएगी। इससे बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होगी और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी। अधिकारियों के अनुसार, इस मॉडल को सफल रहने पर पूरे राज्य के गांवों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और बिजली व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाना है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत 7 किलोमीटर हाई टेंशन (एच.टी.) लाइनें, 9.5 किलोमीटर लो टेंशन (एल.टी.) लाइनें और 800 उपभोक्ताओं के घरों को जोड़ने वाली 41 किलोमीटर सर्विस केबल जमीनदोज बिछाई जाएगी। सतौज के 66 के.वी. ग्रिड से गांव से जुड़े तीन 11 के.वी. फीडर और इससे जुड़े 28 ट्रांसफार्मरों की सारी हाई टेंशन लाइनें जमीन के अन्दर हो जाएंगी। इसके बाद 28 ट्रांसफार्मरों से मीटर बॉक्सों तक की सारी लो टेंशन लाइनें भी जमींदोज की जाएंगी। बिजली की ऊपरी तारों के खतरों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बिजली के खंभों और ऊपरी तारों से पशुओं और लोगों खासकर बच्चों को करंट लगने का खतरा बना रहता है। ट्रैक्टर, कंबाइन और अन्य वाहनों के ऊपरी तारों से संपर्क में आने पर अक्सर हादसे होते हैं। गांवों को निर्विघ्न बिजली सप्लाई मिलेगी, जमींदोज तारों से हादसों में कमी आएगी, बिजली की तारों से फसलों में आग लगने की घटनाएं रुकेंगी और बारिश व तेज हवाएं अब बिजली सप्लाई में बाधा नहीं डाल सकेंगी।