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गर्मियों के मौसम में पड़ रही भीषण लू को देखते हुए जानवरों की उचित देखभाल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाते हुए महेंद्र चौधरी जूलॉजिकल पार्क (छत्तबीड़ चिड़ियाघर) ने वन्य जीवों की सुरक्षा और देखभाल के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री श्री लाल चंद कटारूचक्क की सोच से प्रेरित होकर चिड़ियाघर प्रबंधन ने विभिन्न श्रेणियों के जानवरों को राहत देने के लिए कई उपाय किए हैं। मांसाहारी जानवरों को गर्मी से राहत देने के लिए सभी बाघों, तेंदुओं, शेरों, भालुओं और अन्य जानवरों के बाड़ों में डेजर्ट कूलर और एयर सर्कुलेटर पंखे लगाए गए हैं। पशु प्रबंधन सेल यह सुनिश्चित करने के लिए हर समय सतर्क और सक्रिय है कि ये बाड़े ठंडे और सूखे बने रहें। मच्छर मुक्त वातावरण बनाए रखने के लिए सभी खिड़कियों पर जालियां लगाई गई हैं। इन बाड़ों और कुछ रिहायशी स्थानों को 75 प्रतिशत घनत्व वाले एग्रो नेट से ढका गया है ताकि जानवरों को छाया मिल सके और आसपास का तापमान कम रखने में मदद मिले। आपातकालीन स्थिति में पूरे चिड़ियाघर में पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए टैंकर और ट्रैक्टर हर समय उपलब्ध रहते हैं। शाकाहारी जानवरों को तेज गर्मी और धूप से बचाने के लिए सरकंडे, लकड़ी और बांस आदि से बने अस्थायी शेल्टर और झोपड़ियां तैयार की गई हैं। हाथियों, मणिपुर के हिरणों, स्वैम्प डियर और हिरण सफारी के लिए नहाने हेतु पानी से भरे कीचड़ वाले तालाब बनाए गए हैं। कंक्रीट के पानी के पूल भी चौबीसों घंटे पानी से भरे रहते हैं। बेहतर ठंडक के लिए इन स्थानों के कुछ हिस्सों को 75 प्रतिशत घनत्व वाले एग्रो नेट से ढका गया है। पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए सभी पिंजरों को 75 प्रतिशत घनत्व वाले एग्रो नेट और जूट मैट से अच्छी तरह ढका गया है ताकि उन्हें गर्म हवा और तेज धूप से बचाया जा सके। पक्षियों को अधिक आरामदायक और खुश रखने के लिए छोटे पिंजरों में स्प्रिंकलर शावर भी लगाए गए हैं।