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केंद्रीय मंत्रियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का दिया संदेश
नई दिल्ली: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देशभर में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। सी. पी. राधाकृष्णन ने भारतीय सभ्यता की प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और सभी जीवों की रक्षा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। ओम बिरला ने कहा कि पर्यावरण केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि संसद परिसर में पेपरलेस कार्यप्रणाली, सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध और हरित भवन जैसी पहलें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। राजनाथ सिंह ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जनभागीदारी का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने देशवासियों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की। अमित शाह ने कहा कि भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाला देश बन चुका है। उन्होंने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सौर ऊर्जा विस्तार और वनावरण वृद्धि को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि "पेड़ लगाना, जीवन लगाना है।" उन्होंने प्रत्येक नागरिक से वृक्षारोपण अभियान में भाग लेने और पृथ्वी को सुरक्षित रखने में योगदान देने का आग्रह किया। अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि हर व्यक्ति का छोटा प्रयास भी स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम की घोषणा की। वहीं रेखा गुप्ता ने राजधानी में मेगा प्लांटेशन ड्राइव और 18 नमो ऑक्सीजन पार्कों के विकास की जानकारी दी। मोहन यादव ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया, जबकि भजन लाल शर्मा ने वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को हरित भविष्य की कुंजी बताया। उल्लेखनीय है कि विश्व पर्यावरण दिवस पहली बार वर्ष 1973 में मनाया गया था। इसकी शुरुआत 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद हुई थी। तब से हर वर्ष 5 जून को दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष भी देश के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सफल होने वाला राष्ट्रीय अभियान है।