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चंडीगढ़, 15 जनवरी: फरीदाबाद में प्लॉटों की ई-नीलामी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एच.एस.वी.पी.) को शिकायतकर्ता को मुआवजा देने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्य पूर्ण किए बिना प्लॉटों की नीलामी और कब्जा प्रस्तावित करना नियमों के विरुद्ध है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ई-नीलामी में शामिल किए जाने वाले प्लॉट्स पर सड़क, सीवर, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का उपलब्ध होना अनिवार्य है, ताकि आवंटी समय पर निर्माण कार्य शुरू कर सकें। मामले में पाया गया कि 24 नवंबर 2023 को जारी आवंटन पत्र के साथ कब्जा प्रस्तावित किया गया, जबकि स्थल पर विकास कार्य अधूरे थे। आयोग ने आवंटन पत्र की शर्त संख्या–5 का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि 30 दिनों के भीतर कब्जा नहीं दिया जाता, तो ब्याज देय होता है, जिसे एच.एस.वी.पी. को स्वतः लागू करना चाहिए था। आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि एक सार्वजनिक विकास प्राधिकरण होने के नाते एच.एस.वी.पी. को नागरिकों को अनावश्यक रूप से शिकायत मंचों पर जाने के लिए विवश नहीं करना चाहिए। आयोग ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की 16 अक्टूबर 2025 की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि प्राधिकरणों को अपने वैधानिक दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत आयोग ने शिकायतकर्ता को अधिकतम अनुमेय 5,000 रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं, जिसका भुगतान एच.एस.वी.पी. को 15 दिनों के भीतर करना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि आवंटी अधिक मुआवजे के लिए उपभोक्ता फोरम, उच्च न्यायालय या अन्य सक्षम प्राधिकरण से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र है। साथ ही, भविष्य में बिना विकास कार्य पूरे किए किसी भी प्लॉट को ई-नीलामी में शामिल न करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रकरण की गहन समीक्षा और प्रक्रियागत सुधार सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने मुख्य प्रशासक, एच.एस.वी.पी. से संबंधित फाइल की मूल नोटिंग शीट तथा एस्टेट ऑफिसर, फरीदाबाद से नीलामी, आवंटन और विकास कार्यों से जुड़े अधिकारियों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा है।