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पंजाब/यूटर्न/16 जून। एक तरफ पंजाब सरकार द्वारा इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ सरकारी अधिकारी ही इंडस्ट्री से उसका हक छीनने में लगे हुए हैं। लुधियाना कारोबारी शहर में एक तो पहले से इंडस्ट्रियल लैंड आसानी से नहीं मिलती, जहां मिलती है, वहां कई कॉलोनाइजरों द्वारा अधिकारियों संग मिलीभगत करके इंडस्ट्रियल जोन को खत्म करने की तैयारी कर ली गई है। ताजा मामला गांव जंडियाली की 58 एकड़ जमीन का सामने आया है। जहां पर पंजाब सरकार द्वारा इंडस्ट्रियल लैंड घोषित किया हुआ है। चर्चा है कि अब कई रियल एस्टेट कारोबारियों द्वारा ग्लाडा/ पूड्डा के अधिकारियों से मिलीभगत करके उसे आर जोन यानि कि रेजिडेंशियल जोन घोषित कराने का प्रयास किया जे रहा है। यानि कि ग्लाडा अधिकारी अब उल्टी गंगा बहाने में लगे हैं। इसके लिए बकायदा अखबार में नोटिस भी निकाला गया है। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि वहां पर पहले से ही काफी इंडस्ट्री लग चुकी है। ऐसे में अगर रिहायशी प्लॉट बनेगें, तो फिर वे मिक्स लैंड यूज एरिया बन जाएगा। मिक्स लैंड यूज एरिए शहर के लिए वो नासूर हैं, जिनका 40 साल से हल नहीं हो सका। अब एक और एरिया मिक्स बना दिया जाएगा, तो फिर इंडस्ट्री कहा जाएगी। सालों से इंडस्ट्री अपने हक के लिए लड़ती आ रही है। सरकार को गच्चा देने की तैयारी एक तरफ तो पंजाब में समय समय की सरकारों द्वारा इंडस्ट्री को रिहायशी इलाकों से निकालकर बाहरी एरिया में शिफ्ट करने के प्रयास किए गए। वहीं आप सरकार भी इस प्रयास में लगी है। जिसके चलते सरकार ने खुद जंडियाली गांव एरिया को आई जोन घोषित किया। जहां पर काफी मात्रा में इंडस्ट्रियल यूनिट लगे भी हैं। लेकिन अब उसे ही रेजिडेंशियल एरिया घोषित कर दिया जाएगा, तो आखिर फिर इंडस्ट्री कहा जाएगी। चर्चा यह भी है कि इस फैसले संबंधी सरकार को पता ही नहीं है। सरकारी अधिकारियों द्वारा अंदरखाते ही सारा काम किया जा रहा है। चुनिंदा कॉलोनाइजरों को फायदा पहुंचाने का प्रयास चर्चा है कि पूड्डा द्वारा मास्टर प्लान में संशोधन किया जा रहा है, उसी के तहत गांव जंडियाली की 58 एकड़ जमीन को इंडस्ट्रियल जोन से रेजिडेंशियल जोन बनाया जाएगा। चर्चा है कि इस पूरी प्रक्रिया में कई कॉलोनाइजरों को भारी भरकम फायदा मिलेगा। इसी के चलते उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके यह प्लान तैयार किया है। चुनिंदा कॉलोनाइजरों को फायदा पहुंचाने के लिए शहर का नक्शा खराब किया जा रहा है। नई दुविधा में फंसी इंडस्ट्री एक तरफ पंजाब सरकार इन्वेस्ट पंजाब के तहत इंडस्ट्री को बढ़ाने में लगी है। लेकिन दूसरी तरफ सरकारी विभागों द्वारा इंडस्ट्री के लिए यह नई दुविधा खड़ी कर दी गई है। जिसके चलते कहीं न कहीं यह इंडस्ट्री के प्लायन के कारण भी बन सकते हैं। वहीं गांव जंडियाली की इंडस्ट्रियल एसोसिएशन सरकार को इस मास्टर प्लान संशोधन पर रोक लगाने के लिए मांगपत्र देने के लिए भी तैयार है। मिक्स यूज लैंड एरिया बने नासूर लुधियाना में जनता नगर, शिमलापुरी, सुंदर नगर, ढोलेवाल, ग्यासपुरा, बस्ती जोधेवाल जैसे एरिया मिक्स यूज लैंड हैं। जहां फैक्ट्रियों से रिहायशी लोग परेशान है। 40 साल के दौरान अलग अलग सरकारों ने इस नासूर को खत्म करने की कोशिश की। लेकिन हल नहीं हो सका। हर 10 साल बाद वहां मौजूद इंडस्ट्री को सरकार द्वारा फैक्ट्रियां बाहर ले जाने के नोटिस दे दिए जाते हैं। फिर इंडस्ट्री संघर्ष करती है। लेकिन फैक्ट्री मालिकों को बाहर न तो जमीन सस्ती मिलती है और न ही लेबर मिलती है। जिस कारण फैक्ट्री मालिक बाहर शिफ्ट नहीं हो पाते और वहां रहते लोग परेशान हैं। इससे बड़ी समस्या नहीं आएगी सीआईसीयू के प्रधान व कारोबारी उपकार सिंह आहूजा ने कहा कि 58 एकड़ ज्यादा बड़ा एरिया नहीं है। रेजिडेंशियल घोषित होने पर इससे लेबर को रहने में आसानी होगी। इंडस्ट्री के लिए खड़ी होगी समस्या सीआईआई के प्रवक्ता लोकेशन जैन ने कहा कि एक तरफ सरकार द्वारा मिक्स लैंड यूज से बाहर निकलने के लिए इंडस्ट्रियल जोन बनाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ आई जोन में घर बनाने की तैयारी है। इंडस्ट्री के लिए नई समस्या खड़ी की जा रही है। संघर्ष किया जाएगा यूसीपीएमए के वाइस प्रेजिडेंट और कारोबारी जसविंदर सिंह ठुकराल अनुसार साल 1992 के बाद पंजाब को नया फोकल प्वाइंट नहीं मिला। हम मिक्स यूज लैंड को आई जोन घोषित कराना चाहते हैं, दूसरी तरफ सरकार इंडस्ट्रियल जोन को ही रिहायशी बनाने में लगी है। सरकार की गलत नीतियों के कारण 72 मोहल्लों में 50 हजार इंडस्ट्री बंद होने की कगार पर है। गांव जंडियाली की इंडस्ट्री को साथ लेकर संघर्ष करेगें। ----