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सरकार का बड़ा फैसला, मदरसा बोर्ड खत्म कर नई व्यवस्था लागू होगी एक जुलाई से
देहरादून (Narendra Singh Danu) : 1 जुलाई से Uttarakhand में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के लिए बदलेगा प्रशासनिक ढांचा. उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड की जगह नई संस्था के जरिए संचालित होगी अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था यह उत्तराखंड सरकार के अल्पसंख्यक शिक्षा ढांचे में बड़ा प्रशासनिक बदलाव है। मुख्य बिंदु संक्षेप में: क्या बदलेगा? 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा। उसकी जगह नया उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण काम करेगा। इसका असर किन पर पड़ेगा? राज्य के लगभग 452 पंजीकृत मदरसों पर यह नई व्यवस्था लागू होगी। सिर्फ मुस्लिम संस्थान ही नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक श्रेणी में आने वाले: मुस्लिम ईसाई सिख बौद्ध जैन पारसी समुदायों के शैक्षणिक संस्थान भी इसके दायरे में आएंगे। नई प्रक्रिया क्या होगी? अब संस्थानों को दो चरणों से गुजरना होगा: पहले उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी। फिर नए प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। मान्यता के लिए जरूरी शर्तें: भूमि स्वामित्व/उपलब्धता वित्तीय स्थिति योग्य स्टाफ सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता मान्यता कितने समय के लिए? 3 शैक्षणिक वर्षों के लिए वैध होगी। नवीनीकरण के लिए 3 महीने पहले आवेदन जरूरी होगा। सरकार का तर्क पुष्कर सिंह धामी सरकार का कहना है कि इससे: शिक्षा में पारदर्शिता बढ़ेगी गुणवत्ता में सुधार होगा संस्थागत निगरानी मजबूत होगी क्या मदरसे बंद होंगे? नहीं। अभी उपलब्ध जानकारी के अनुसार पंजीकृत मदरसे तुरंत बंद नहीं होंगे, बल्कि उन्हें नई मान्यता प्रणाली में शिफ्ट किया जाएगा। यह कदम प्रशासनिक नियंत्रण और शिक्षा मानकीकरण की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।