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चंडीगढ़ के प्रोफेसर की आपत्ति के बाद सुनिधि चौहान के कुछ गानों पर सवाल, गोवा शो से पहले नोटिस जारी चंडीगढ़।बॉलीवुड सिंगर सुनिधि चौहान के चर्चित गानों को लेकर अब मंचीय प्रस्तुतियों पर बहस शुरू हो गई है। चंडीगढ़ में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर पंडितराव धरेन्नावर की शिकायत के बाद गोवा प्रशासन ने सुनिधि चौहान और कार्यक्रम आयोजकों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस गोवा के 1919 स्पोर्ट्स क्रिकेट स्टेडियम में 25 जनवरी को होने वाली उनकी लाइव परफॉर्मेंस से पहले जारी किया गया है। शिकायत में ‘बीड़ी जलईले जिगर से’ और ‘वो शराबी’ जैसे गानों पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि इस तरह की प्रस्तुति समाज, खासकर बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इसी आधार पर साउथ गोवा के डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर ने आयोजकों को निर्देश दिए हैं कि मंच से ऐसे गीतों का प्रदर्शन न किया जाए। प्रोफेसर पंडितराव धरेन्नावर का कहना है कि लाइव कॉन्सर्ट में बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में शराब, हिंसा और भड़काऊ संदेश देने वाले गीत समाज को गलत दिशा में ले जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के गानों से जुड़े कई हादसे पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें लोगों की जान तक गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में सुनिधि चौहान के जयपुर सहित अन्य शहरों में होने वाले कार्यक्रमों पर भी नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रशासन को शिकायत दी जाएगी। उनका उद्देश्य कलाकारों को सेंसर करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है। पंडितराव धरेन्नावर इससे पहले भी कई नामी गायकों के गीतों को लेकर आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। करण औजला, दिलजीत दोसांझ, शैरी मान और बब्बू मान जैसे कलाकारों के कुछ गानों को लेकर भी वे प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं। उनका मानना है कि जो गीत संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ जाते हैं, उनका विरोध लगातार होना चाहिए। कर्नाटक मूल के पंडितराव धरेन्नावर वर्ष 2003 से शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में चंडीगढ़ के सेक्टर-46 स्थित सरकारी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। पंजाब की संस्कृति से प्रभावित होकर उन्होंने पंजाबी भाषा बोलना, पढ़ना और लिखना भी सीखा है। वर्ष 2016 में पंजाब में हिंसक गानों से जुड़े एक हादसे के बाद उन्होंने ऐसे गीतों के खिलाफ आवाज उठाने का निर्णय लिया था, जिसे वे आज तक जारी रखे हुए हैं।