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200 करोड़ की परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया होगी शुरू, दूसरे चरण में 92 प्लॉटों की नीलामी की तैयारी
चंडीगढ़ (Naren Danu) : सेक्टर-39 में प्रस्तावित नई अनाज मंडी परियोजना को लंबे इंतजार के बाद अब गति मिलने की उम्मीद है। प्रशासन को इस माह परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी मिलने की संभावना है। मंजूरी मिलते ही मंडी निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। साथ ही दूसरे चरण के तहत मंडी परिसर में विकसित किए जाने वाले प्लॉटों की नीलामी भी आरंभ होगी। प्रशासन का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक सेक्टर-26 स्थित मौजूदा अनाज मंडी को नई मंडी में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करना है। नई मंडी परियोजना के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और इंजीनियरिंग विभाग भी इसे स्वीकृति दे चुका है। परियोजना पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कृषि विभाग की योजना है कि मंडी के प्लॉटों की नीलामी से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग निर्माण कार्य में किया जाए, ताकि परियोजना के लिए अलग से ऋण लेने की आवश्यकता न पड़े। कृषि विभाग के सचिव डी. कार्तिकेयन की अध्यक्षता में इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए, ताकि वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द पूरी हो सके। सेक्टर-39 में करीब 75 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाली इस आधुनिक मंडी में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। परियोजना की अनुमानित लागत में राज्य कृषि विपणन बोर्ड के कार्यालय भवन पर लगभग 13.50 करोड़ रुपये तथा मार्केट कमेटी कार्यालय पर 9.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा मंडी परिसर में दो आधुनिक कोल्ड स्टोरेज भी बनाए जाएंगे, जिससे किसानों और व्यापारियों को कृषि उत्पादों के भंडारण की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। यह भूमि वर्ष 1990 में यूटी प्रशासन ने लगभग तीन करोड़ रुपये में मंडी बोर्ड को उपलब्ध कराई थी। परियोजना की डीपीआर नेबकन कंपनी ने तैयार की है। हालांकि कृषि विभाग ने निर्माण लागत कम करने का सुझाव दिया था, लेकिन कंपनी ने विस्तृत अध्ययन के बाद स्पष्ट किया कि लागत में कमी की गुंजाइश नहीं है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में इस परियोजना की लागत लगभग 155.79 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो लगातार देरी और निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों के कारण बढ़कर करीब 200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रशासन अब तक पहले चरण में 12 प्लॉटों की नीलामी कर चुका है। दूसरे चरण में 92 प्लॉटों की नीलामी की जाएगी। इस बार नीलामी में स्थानीय आढ़तियों को कोई विशेष प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। नए कलेक्टर रेट लागू होने के बाद शोरूम प्लॉटों का आरक्षित मूल्य 3.70 करोड़ रुपये से बढ़कर 5.40 करोड़ रुपये हो गया है। नीलामी में दूसरे राज्यों के व्यापारी और निवेशक भी भाग ले सकेंगे। गौरतलब है कि सेक्टर-39 मंडी परियोजना पिछले तीन दशकों से विभिन्न कारणों से अटकी रही है। वर्ष 2014 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन धन की कमी के चलते 2015 में इसे रोकना पड़ा। इसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चली कानूनी प्रक्रिया, कजौली जलापूर्ति पाइपलाइन का मामला तथा अन्य तकनीकी अड़चनों के कारण परियोजना लगातार विलंबित होती रही। अब पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद प्रशासन को उम्मीद है कि नई मंडी का निर्माण तेज गति से आगे बढ़ेगा और चंडीगढ़ को आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया कृषि व्यापार केंद्र मिलेगा।