कुरुक्षेत्र के प्रेरणा वृद्धाश्रम में बुजुर्गों से मिलकर दिव्या सैनी ने उनके जीवन संघर्ष सुने और भावुक हो गईं। कार्यक्रम में बुजुर्गों ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि आश्रम प्रबंधन ने भारतीय पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के सम्मान का संदेश देते हुए अतिथियों का सम्मान किया।
कुरुक्षेत्र (अश्विनी वालिया) : धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के प्रेरणा वृद्धाश्रम की ख्याति विदेश में भी हो रही है। इसी लिए दूसरे देशों से नियमित लोग आते रहते हैं। इसी क्रम में सात समुद्र पार बर्लिन से प्रेरणा वृद्धाश्रम में दिव्या सैनी बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने के लिए पहुंची।
प्रेरणा वृद्धाश्रम के संस्थापक एवं संचालक डा. जय भगवान सिंगला ने बताया कि प्रेरणा वृद्धाश्रम की ख्याति सुनकर बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने के लिए दिव्या सैनी नाम की यह लड़की जर्मनी से प्रेरणा वृद्धाश्रम में पहुंची। यह लड़की बुजुर्गों से मिलकर और उनके दुख दर्द जानकर भावुक हो गई। उसने कहा कि हमारा देश तो समृद्ध परंपराओं, संस्कार और उच्च संस्कृति से ओतप्रोत देश है, फिर हमारे देश में ऐसे संस्कार कहां से आ गए। विदेश की बात तो अलग है वहां तो कोई किसी से लगाव नहीं रखता। एक उम्र के बाद माता पिता बच्चों का मोह छोड़ देते हैं और बच्चों को भी अपने माता पिता से कोई मोह नहीं रहता है। लेकिन हमारा देश भारत तो ऐसा देश है जहां भगवान राम ने पिता का आदेश मानकर अपना राजपाट त्याग दिया था।
इस अवसर पर आशा सिंगला और किरण गर्ग ने दिव्या सैनी का अंग वस्त्र से सम्मान किया। प्रेरणा की सक्रिय सदस्य सुरेखा ने एक भजन के माध्यम से अपने विचार रखे और सबको भावुक कर दिया। इस अवसर पर दिव्या सैनी की सास सुमन सैनी भी उसके साथ थी। उन्होंने कहा कि मुझे अपनी बहू दिव्या पर गर्व है, जो विदेश में रहकर भी जरा नहीं बदली और भारतीय संस्कृति और संस्कारों की हृदय से प्रशंसक है। विदेश में रहकर भी हमारे दुख सुख का ख्याल रखती है।
इस अवसर पर सभी बुजुर्गों ने दिव्या से अपने मन की बात साझा की और इस बात पर दुख प्रकट किया कि जिन बच्चों के लिए हमने पूरा जीवन लगा दिया, जब हमें उनकी जरूरत पड़ी तो उन्होंने हमें बेदर्दी से ठुकरा दिया। यह बात सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं। इस अवसर पर ऊषा सच्चर, कौशल, बलविंदर कौर, बलदेव श्रीवास्तव, मगत राम, जोगिंदर इत्यादि सभी बुजुर्ग मौजूद रहे। डा. जय भगवान सिंगला ने इस मौके पर अतिथियों को स्वरचित, कई पुस्तकें भेंट की।