6 साल पहले हुई थी लव मैरिज, फोन पर झगड़े के बाद उठाया कदम
लुधियाना/यूटर्न/24 जुलाई। लुधियाना के बहुचर्चित ईस्सेवाल गैंगरेप के मुख्य गवाह रहे युवक ने फिरोजपुर रोड पर दाखा के पास खुद को लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मार ली। उसने चलती स्कार्पियों में सिर में गोली मारी। जिससे कार असंतुलित होकर साइन बोर्ड के पोल से जा टकराई। राहगीरों ने उसे डीएमसी अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृतक करार दे दिया। मृतक की पहचान गांव दाखा निवासी जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सा के रूप में हुई है। थाना दाखा की पुलिस ने लाश कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दी है। पुलिस द्वारा गोली वाली बात से साफ इंकार किया जा रहा है।
परिवार में विवाद रहने की चर्चाएं
जसप्रीत ने छह साल पहले लव मैरिज करवाई थी। उसके एक चार साल की बेटी भी है। उसके माता पिता दाखा गांव में रहते हैं, जबकि वे खुद बीआरएस नगर में पत्नी और बेटी संग रहता था। परिवार का आरोप है कि जसप्रीत और उसकी पत्नी में घरेलू विवाद था। जसप्रीत के दोस्त जोत अनुसार वे बहुत दुखी था। हालांकि परिवार ने अभी पुलिस को बयान नहीं दिए हैं।
रोकने का किया प्रयास, लेकिन गुस्से में नहीं रुका
दोस्त जोत अनुसार वीरवार को जसप्रीत गांव दाखा में माता पिता से मिलने के बाद शाम को वापिस बीआरएस नगर जा रहा था। वह फोन पर किसी के साथ झगड़ रहा था। दाखा में हवेली के पास उसने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर निकाली। उसकी कार को जबरन रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं रुका। उसने रिवॉल्वर सिर पर रखकर फायर कर दिया। जिसके बाद कार बेकाबू हो गई और पोल से टकरा गई।
ईस्सेवाल गैंगरेप का था मुख्य गवाह
जसप्रीत सिंह वे बहादुर युवा था, जिसने पंजाब के बहुचर्चित ईस्सेवाल गैंगरेप के दोषियों को सजा दिलाई थी। दरअसल, 9 फरवरी 2019 को बीआरएस नगर की एक युवती और दोस्त युवक साउथ सिटी रोड पर ईस्सेवाल गांव के पास नहर किनारे कार में बैठे थे। एक नाबालिग समेत छह युवकों ने उन्हें घेरकर लड़की के साथ कई बार गैंगरेप किया। लड़की के दोस्त ने जसप्रीत को कॉल की तो बदमाशों ने उससे फिरौती मांगी। जसप्रीत पैसे लेकर अकेला चला गया। लेकिन बदमाश उसे नहीं मिले। फिर तड़के वे लड़का-लड़की को सड़क पर छोड़ भाग गए। इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई। मामला पूरे पंजाब में चर्चा का विषय बना।
दोषियों को दिलाई थी सजा
गैंगरेप केस का मुख्य इकलौता गवाह होने के चलते उसे दोषियों की तरफ से कई बार पैसों की ऑफर, धमकियां भी मिली, लेकिन वे मुख्य गवाह के तौर पर केस लड़ता रहा। सेफ्टी के लिए उसे पंजाब पुलिस ने वेपन लाइसेंस बनाकर दिया था। जिसके बाद साल 2022 में माननीय अदालत ने पांच दोषियों को उम्रकैद और एक-एक लाख जुर्माना व एक नाबालिग को 20 साल कैद और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इंस्पेक्टर कुलजिंदर सिंह का कहना है कि गोली चलने और पत्नी से विवाद की कोई बात अभी तक सामने नहीं आई है। कार असंतुलित होकर पोल से टकराने पर युवक का सिर अगले शीशे में लगा, जिससे मौत हो गई।
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