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लुधियाना 28 Jan : इंजीनियर परमजीत सिंह भारज ने पंजाब सरकार द्वारा आज तक पंजाब के गांवों और सभी जिलों में लाइब्रेरी खोलने से संबंधित लाइब्रेरी एक्ट को मंजूरी न दिए जाने पर गहरी नाराज़गी और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद अब तक किसी भी सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका सीधा नुकसान पंजाब के गरीब और ज़रूरतमंद विद्यार्थियों को हो रहा है। उन्होंने बताया कि पंजाब में जो भी लाइब्रेरी मौजूद हैं, वे अधिकतर ब्रिटिश साम्राज्य के समय की बनी हुई हैं, जिन्हें न तो आज के समय के अनुसार अपडेट किया गया है और न ही आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। आज जब पूरी दुनिया कंप्यूटर, इंटरनेट और डिजिटल शिक्षा के युग में प्रवेश कर चुकी है, पंजाब की लाइब्रेरी अभी भी पुरानी सोच और सीमित संसाधनों तक सिमटी हुई हैं। इसके अलावा, ये लाइब्रेरी पंजाब के सभी जिलों में भी उपलब्ध नहीं हैं। इंजीनियर भारज ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पंजाब में लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए 60% प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान है, जबकि राज्य सरकार को केवल 40% प्रतिशत हिस्सा वहन करना होता है। लेकिन लाइब्रेरी एक्ट को मंजूरी न मिलने के कारण यह केंद्रीय अनुदान भी उपयोग में नहीं लाया जा रहा, जिससे ज़रूरतमंद विद्यार्थी शिक्षा के बुनियादी अधिकार से वंचित रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भी पंजाब में अनेक ऐसे विद्यार्थी हैं जो महंगी किताबें, कोचिंग या प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक अध्ययन सामग्री खरीदने में असमर्थ हैं। यदि हर गांव और जिले में आधुनिक सुविधाओं से लैस लाइब्रेरी हों—जहां कंप्यूटर, इंटरनेट और अपडेटेड पुस्तकें उपलब्ध हों—तो ऐसे विद्यार्थी आईएएस/आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे उच्च पदों तक पहुंच सकते हैं। इंजीनियर परमजीत सिंह भारज ने पंजाब सरकार से अपील की कि वह शीघ्र लाइब्रेरी एक्ट को पारित कर केंद्र सरकार से मिलने वाले 60% प्रतिशत अनुदान का सही उपयोग करे और इसका लाभ ज़रूरतमंद पंजाबी युवाओं तक पहुंचाए, ताकि पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में पुनः अपनी अग्रणी पहचान बना सके।