साइबर ठगी के एक बड़े मामले में साइबर क्राइम थाना मोहाली ने 67.66 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
-एसएसपी के आदेश पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ साइबर थाना मोहाली में एफआईआर दर्ज, जांच शुरू
मोहाली 02 Aug । साइबर ठगी के एक बड़े मामले में साइबर क्राइम थाना मोहाली ने 67.66 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों ने खुद को यूको बैंक का कर्मचारी बताकर 74 वर्षीय महिला के मोबाइल में फर्जी यूको लाइफ सर्टिफिकेट डॉट एपीके फाइल डाउनलोड करवाई। इसके जरिए मोबाइल हैक कर महिला की नौ फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के खिलाफ लोन लेकर रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
पुलिस के अनुसार सेक्टर-69 निवासी आशा झांब ने एनसीसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया कि 30 अक्तूबर 2025 को उन्हें एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने लाइफ सर्टिफिकेट ऑनलाइन अपडेट कराने का झांसा देकर एपीके फाइल डाउनलोड करवाई और बैंक संबंधी जानकारी भरवाई। इसके बाद 31 अक्तूबर से 1 नवंबर 2025 के बीच उनकी एफडी के विरुद्ध लोन लेकर कुल 67,66,943 रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। आरोपी ट्रांजेक्शन के मोबाइल संदेश भी डिलीट करता रहा। बाद में बेटी की मदद से बैंक स्टेटमेंट देखने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ, जिसके बाद महिला ने तत्काल बैंक खाता फ्रीज कराया।
साइबर थाना की जांच में शिकायत सही पाए जाने पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 319, 318(4), 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। बाद में मामले की दोबारा जांच एसपी स्तर पर भी कराई गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पीड़िता ने मामले की शिकायत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से भी की थी। आरबीआई ने जांच के बाद यूको बैंक, कैनरा बैंक, बंधन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक पर कुल 28.25 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई। इनमें से कैनरा बैंक, बंधन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया ने संबंधित राशि पीड़िता को लौटा दी है, जबकि यूको बैंक और एक्सिस बैंक से भुगतान होना अभी बाकी है।
एसएसपी मोहाली ने जांच रिपोर्ट के बाद साइबर थाना प्रभारी को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच इंस्पेक्टर गौरव बंस सिंह को सौंप दी गई है। जांच अधिकारी गौरव बंस ने बताया कि पुलिस ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की जांच कर आरोपियों की पहचान में जुटी है।