ज्वैलर की चोरी की शिकायत पर केस दर्ज कराने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप
थाना-26 से जुड़े मामले में नगर निगम के वरिष्ठ पार्षद की भूमिका भी जांच के घेरे में
बातचीत की रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही सीबीआई
थाना-26 से जुड़े मामले में नगर निगम के वरिष्ठ पार्षद की भूमिका भी जांच के घेरे में
बातचीत की रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही सीबीआई
अजीत झा.
चंडीगढ़ Aug 03 : चंडीगढ़ पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना-26 क्षेत्र की बापूधाम चौकी के प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश कुमार और एएसआई मंगत उर्फ मंगता को कथित तौर पर ढाई लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि दोनों पुलिस अधिकारियों ने एक ज्वैलर की दुकान में हुई चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई करने के बदले पहले पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में कथित तौर पर सौदा ढाई लाख रुपये में तय हुआ, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने सीबीआई का दरवाजा खटखटाया।
सीबीआई ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद पूरे मामले की निगरानी की। आरोपों की पुष्टि होने पर सोमवार को योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप लगाया गया और जैसे ही रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, टीम ने दोनों पुलिस अधिकारियों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए सीबीआई कार्यालय ले जाया गया। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में दिनभर इस मामले की चर्चा होती रही।
दुकान मालिक की मौत के बाद खुला चोरी का मामला
सूत्रों के अनुसार मामला बापूधाम स्थित एक ज्वैलरी शॉप से जुड़ा है। दुकान मालिक निर्मल सिंह का कुछ समय पहले निधन हो गया था। उनके निधन के बाद जब उनके बेटे सोनू ने कई दिनों बाद दुकान खोली तो काफी मात्रा में सोना और अन्य कीमती आभूषण गायब मिले। परिवार को संदेह एक महिला कर्मचारी पर हुआ, जिसके पास दुकान की चाबी रहती थी।
शिकायतकर्ता ने इस संबंध में थाना-26 में लिखित शिकायत देकर महिला कर्मचारी के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज करने की मांग की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय मामला लंबित रखा। इसी दौरान कथित रूप से एफआईआर दर्ज करने के बदले रिश्वत की मांग शुरू हुई।
पहले पांच लाख की मांग, फिर ढाई लाख में हुआ सौदा
सूत्रों का दावा है कि शिकायतकर्ता से शुरुआत में पांच लाख रुपये मांगे गए। कई दौर की बातचीत के बाद कथित तौर पर रकम घटाकर ढाई लाख रुपये कर दी गई। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय पूरे मामले की जानकारी सीबीआई को दी। इसके बाद सीबीआई ने शिकायत का सत्यापन किया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ट्रैप की योजना बनाई।
सोमवार को शिकायतकर्ता को निर्धारित स्थान पर भेजा गया। जैसे ही आरोपियों ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम स्वीकार की, सीबीआई टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
नगर निगम के वरिष्ठ पार्षद की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले का एक और अहम पहलू नगर निगम के एक वरिष्ठ पार्षद का नाम सामने आना है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि क्या संबंधित पार्षद ने शिकायतकर्ता और पुलिस अधिकारियों के बीच किसी प्रकार की मध्यस्थता या बिचौलिये की भूमिका निभाई थी।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता और पुलिस अधिकारियों के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग तथा अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जांच एजेंसी के कब्जे में हैं। इन्हीं के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। हालांकि अभी तक पार्षद के खिलाफ कोई आधिकारिक आरोप दर्ज नहीं किया गया है और जांच जारी है।
पहले से विवादों में रहा है थाना-26
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि थाना-26 के एसएचओ रामरत्न पहले से ही सीबीआई के एक अन्य भ्रष्टाचार मामले में आरोपी हैं और उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चल रहा है। अब उसी थाने से जुड़े चौकी प्रभारी और एएसआई की गिरफ्तारी के बाद एक ही थाने के तीन पुलिस अधिकारियों का नाम सीबीआई मामलों में सामने आने से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
पुलिस विभाग में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि यदि एफआईआर दर्ज करने की शक्ति थाने के पास होती है, तो क्या इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक थी या नहीं। जांच के दौरान इस पहलू की भी पड़ताल की जा सकती है कि क्या रिश्वत मांगने की कथित साजिश केवल दो अधिकारियों तक सीमित थी या इसमें अन्य लोगों की भी कोई भूमिका थी।
जीरो टॉलरेंस नीति की होगी परीक्षा
सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस महकमे की नजर अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई है। इससे पहले सेक्टर-39 थाना से जुड़े रिश्वत प्रकरण में पुलिस महानिदेशक डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस मामले में भी विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कथित “जीरो टॉलरेंस” नीति पर कायम रहेगा और क्या केवल गिरफ्तार अधिकारियों तक कार्रवाई सीमित रहेगी या पूरे मामले की विभागीय स्तर पर भी गहन जांच होगी।
उल्लेखनीय है कि पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया भी सार्वजनिक मंचों से स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे में सीबीआई की इस कार्रवाई ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।