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लुधियाना 29 Jan : पंजाब की औद्योगिक राजधानी लुधियाना में व्यापार और उद्योग जगत गंभीर संकट से जूझ रहा है। वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने आरटीओ, डीटीओ और ट्रैफिक पुलिस द्वारा कमर्शियल वाहनों की कथित मनमानी रोक-टोक और उससे उपजी अवैध वसूली व्यवस्था पर कड़ा एतराज जताया है। संगठन का कहना है कि वैध दस्तावेजों, परमिट और ई-वे बिल होने के बावजूद वाहनों को बार-बार रोका जा रहा है, जिससे उद्योगों की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है। फोरम के अनुसार, पहले से आर्थिक मंदी और स्लोडाउन के दौर से गुजर रहे लुधियाना उद्योग पर यह अतिरिक्त दबाव भारी पड़ रहा है। कच्चे माल और तैयार माल की आवाजाही बाधित होने से लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ गई है और डिलीवरी सिस्टम लगभग ठप हो गया है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस व्यवस्था के बीच अवैध मिडलमैन और असामाजिक तत्व फल-फूल रहे हैं। लगातार चालान, वाहन जब्ती और परेशानियों के डर से ट्रांसपोर्टरों और उद्योगपतियों को कथित तौर पर ‘फिक्स मंथली पेमेंट’ करनी पड़ रही है, ताकि वाहनों की निर्बाध आवाजाही बनी रहे और बेवजह चालान से बचा जा सके। व्यापार संगठनों का कहना है कि इससे ऐसा माहौल बन गया है जिसमें कानून का पालन करने वाले उद्यमी परेशान हो रहे हैं, ड्राइवरों को डराया जा रहा है और ईमानदार कारोबार घाटे की ओर धकेले जा रहे हैं, जबकि अवैध दलाल व्यवस्था मजबूत हो रही है। वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने इसे “सिस्टमेटिक हैरेसमेंट और इनडायरेक्ट एक्सटॉर्शन” करार देते हुए कहा कि यह ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और पारदर्शी शासन की भावना के खिलाफ है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो एमएसएमई बंद होंगे, रोजगार घटेगा, उद्योग दूसरे राज्यों की ओर पलायन करेगा और पंजाब की औद्योगिक छवि को दीर्घकालिक नुकसान होगा। फोरम ने सरकार से चार अहम मांगें रखी हैं— नियमों का पालन करने वाले वाहनों को बेववजह रोकने पर रोक लगे। अवैध मिडलमैन नेटवर्क की पहचान कर उसे खत्म किया जाए। केवल वास्तविक उल्लंघन पर ही चालान किए जाएं। टेक्नोलॉजी आधारित, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू हो। उद्योग जगत का कहना है कि आर्थिक पुनरुद्धार डर, उत्पीड़न और अनौपचारिक भुगतान के माहौल में संभव नहीं है। व्यापारिक समुदाय को उम्मीद है कि सरकार त्वरित हस्तक्षेप कर लुधियाना उद्योग को राहत देगी और पंजाब में रोजगार व निवेश का भरोसा बहाल करेगी।