सीआईसीयू की बैठक में उद्योगपतियों ने कहा कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए तकनीक और अनुसंधान में निवेश बढ़ाना होगा। खासकर एमएसएमई के लिए उत्पाद विकास, एआई आधारित गुणवत्ता नियंत्रण और ऊर्जा दक्षता में आरएंडडी महत्वपूर्ण है। डेलक्स बियरिंग्स के कीर्ति राठौड़ ने तकनीक को खर्च नहीं बल्कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा में निवेश बताया।
लुधियाना : भारतीय उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने के लिए तकनीक, ऑटोमेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनुसंधान एवं विकास में तेजी से निवेश करना जरूरी है। यह बात लुधियाना के होटल पार्क प्लाजा में चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) की व्यापारिक नेताओं की बैठक 2026 में सामने आई। बैठक की अध्यक्षता सीआईसीयू अध्यक्ष उपकार सिंह आहूजा ने की, जबकि वरिष्ठ उपाध्यक्ष जेएस भोगल ने चर्चा का संचालन किया।
बैठक में उद्योगपतियों ने कुशल कर्मचारियों की कमी को बड़ी चुनौती बताया। उनका कहना था कि ऑटोमेशन को रोजगार खत्म करने के बजाय कर्मचारियों को अधिक तकनीकी और उच्च-मूल्य वाले कामों से जोड़ने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
चीन की बढ़ती विनिर्माण क्षमता पर भी चिंता जताई गई। चर्चा में कहा गया कि भारत को उत्पादकता, गुणवत्ता, लागत और डिलीवरी के मामले में वैश्विक मानकों के बराबर पहुंचने के लिए ऑटोमेशन और रोबोटिक्स को तेजी से अपनाना होगा।
आरएंडडी निवेश को लेकर भी उद्योगपतियों ने चिंता जताई। उनका कहना था कि भारतीय कंपनियों, खासकर एमएसएमई, को उत्पाद विकास, प्रक्रिया सुधार, एआई आधारित गुणवत्ता नियंत्रण और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्रों में शोध पर निवेश बढ़ाना होगा।
डेलक्स बियरिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं एमडी कीर्ति राठौड़ ने तकनीक और नवाचार को खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा में निवेश बताया। सीआईसीयू अध्यक्ष उपकार सिंह आहूजा ने कहा कि जो उद्योग समय रहते खुद को तकनीक के अनुरूप बदलेंगे, वही आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार का नेतृत्व कर पाएंगे।