हरियाणा में सफाई और फायर कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को 14वें दिन भी जारी रही। अंबाला सदर नगर परिषद में कर्मचारियों ने लंबित मांगों और 13 मई के समझौते को लागू करने की मांग उठाई। धरने में पहुंचीं चित्रा सरवारा और कई पार्षदों ने कर्मचारियों का समर्थन किया तथा सरकार से नियमितीकरण, रोजगार सुरक्षा और लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की अपील की।
अंबाला ( जगदीप सिंह) : हरियाणा में सफाई और फायर कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर चल रही हड़ताल बुधवार को 14वें दिन भी जारी रही। नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर नगर परिषद अंबाला सदर के मुख्य द्वार पर सफाई एवं फायर विभाग के सैकड़ों कर्मचारी धरने पर बैठे रहे। कर्मचारियों ने सरकार से पूर्व में हुए समझौते को लागू करने और लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
हड़तालरत कर्मचारियों को समर्थन देने के लिए टीम चित्रा सरवारा की संयोजक चित्रा सरवारा के साथ विभिन्न वार्डों के पार्षद भी नगर परिषद परिसर पहुंचे। वार्ड नंबर 1 से पार्षद सोनू गुज्जर, वार्ड नंबर 5 से पार्षद जीवन, वार्ड नंबर 6 से संदीप शर्मा, वार्ड नंबर 11 से नीलम कश्यप, वार्ड नंबर 25 से राहुल सोनकर तथा टीम चित्रा के अनेकों वरिष्ठ साथियों सहित अन्य समर्थकों ने कर्मचारियों के धरने में पहुंचकर उनकी मांगों का समर्थन किया।
इस अवसर पर चित्रा सरवारा ने कहा कि सरकार एक ओर 'स्वच्छ भारत' का नारा देती है, लेकिन जिस वर्ग के कर्मचारी शहरों को साफ रखने और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में दिन-रात जुटे रहते हैं, उनकी समस्याओं की अनदेखी किया जाना गंभीर विरोधाभास है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत का सपना केवल नारों और अभियानों से पूरा नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए सफाई कर्मचारियों को सम्मानजनक सेवा शर्तें, रोजगार की सुरक्षा और उनके अधिकारों की गारंटी भी देनी होगी।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी और फायर ब्रिगेड कर्मचारी समाज के ऐसे महत्वपूर्ण हिस्से हैं, जिनकी सेवाओं की आवश्यकता सामान्य परिस्थितियों के साथ-साथ आपदा और आपातकाल के समय भी सबसे अधिक होती है। इसके बावजूद कर्मचारियों को लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था में रखना और उनकी जायज मांगों को लंबित रखना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
चित्रा सरवारा ने कहा कि 13 मई को हरियाणा सरकार और कर्मचारियों के बीच हुए समझौते को लागू किया जाना चाहिए। यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर सहमति व्यक्त की थी तो अब उसे धरातल पर उतारने में देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को बार-बार आंदोलन के लिए मजबूर करना किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि 12 वर्षों से एक भी कर्मचारी का नियमित नहीं होना चौंकाने वाला आंकड़ा है। लंबे समय से विभाग में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सरकार को स्पष्ट और ठोस नीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी की नौकरी को ग्रुप-डी से बाहर किए जाने का निर्णय भी कर्मचारियों के हितों और उनके रोजगार की गरिमा के संदर्भ में गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों की समस्याओं को टालने के बजाय उनके साथ तत्काल वार्ता कर समाधान निकाला जाए और 13 मई के समझौते को लागू करने की दिशा में स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था और अग्निशमन जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी का सीधा असर शहर की व्यवस्था पर पड़ सकता है।
हड़ताल के दौरान कर्मचारी नेताओं ने भी सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। सफाई कर्मचारी नेताओं बीरपाल कांगड़ा, राजिंदर, सुनील, नेता सुमित और कमल ने कर्मचारियों को संबोधित किया। वहीं फायर विभाग की ओर से पापिंदर, अनिल अत्रे, रमेश और राकेश सहित अन्य नेताओं ने कर्मचारियों की मांगों को लेकर अपनी बात रखी।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते को लागू कर गतिरोध समाप्त किया जाए, ताकि कर्मचारी भी सम्मानपूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें और शहर की सफाई एवं अग्निशमन व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित हो सके।