जीरकपुर के नाभा-भबात रोड स्थित क्राउनिस फ्रूट बीयर फैक्ट्री में पुलिस और फूड सेफ्टी विभाग ने संयुक्त जांच की। उत्पादन प्रक्रिया, स्वच्छता, उत्पाद की गुणवत्ता, फायर सेफ्टी और सप्लाई से पहले टेस्टिंग व्यवस्था की पड़ताल की गई। अधिकारियों ने सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए हैं। अब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जीरकपुर : नाभा-भबात रोड पर फ्रूट बीयर तैयार करने वाली क्राउनिस नामक फैक्ट्री में जीरकपुर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर जांच की। पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचीं एएसपी ग़ज़लप्रीत कौर ने उत्पादन स्थल पर साफ-सफाई, उत्पाद की टेस्टिंग और फूड सेफ्टी मानकों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की। पुलिस की सूचना पर फूड सेफ्टी अधिकारी कंवरदीप सिंह भी मौके पर पहुंचे और फ्रूट बीयर के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे।
एएसपी ग़ज़लप्रीत कौर के अनुसार शुरुआती निरीक्षण में उत्पादन के दौरान स्वच्छता व्यवस्था को लेकर कुछ सवाल सामने आए। उन्होंने बताया कि किसी भी खाद्य अथवा पेय उत्पाद को बाजार में भेजने से पहले निर्धारित मानकों के अनुसार उसकी जांच जरूरी होती है, ताकि बोतल पर दर्ज सामग्री और मात्रा की पुष्टि हो सके। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि उत्पाद की सप्लाई से पहले आवश्यक टेस्टिंग प्रक्रिया का पालन किया जा रहा था या नहीं।
फूड सेफ्टी अधिकारी कंवरदीप सिंह ने फैक्ट्री के दस्तावेजों की जांच करने के साथ उत्पाद के सैंपल लिए। उनके अनुसार प्राथमिक स्तर पर दस्तावेज सही पाए गए हैं और सैंपल में भी तत्काल कोई स्पष्ट खामी सामने नहीं आई। हालांकि गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की वास्तविक स्थिति लैब रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस जांच के दौरान उत्पाद की लागत और बाजार में बिक्री मूल्य को लेकर भी जानकारी जुटाई गई। पूछताछ में सामने आया कि फ्रूट बीयर की एक बोतल तैयार करने की लागत करीब 15 से 20 रुपये बताई गई, जबकि इसे दुकानदारों तक लगभग 30 से 40 रुपये में पहुंचाया जाता है और बाजार में इसकी कीमत करीब 100 रुपये तक होने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार फैक्ट्री में पूर्व में भी जांच की जा चुकी है।
एएसपी ने बताया कि यदि फूड सेफ्टी विभाग की लैब रिपोर्ट में सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा। जरूरत पड़ने पर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखा जाएगा।
आग की स्थिति में कितना सुरक्षित है प्लांट?
फैक्ट्री परिसर में गैस सिलेंडरों और अन्य उपकरणों की मौजूदगी के बीच फायर सेफ्टी व्यवस्था भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार CO₂ स्वयं ज्वलनशील गैस नहीं है, लेकिन अत्यधिक गर्मी की स्थिति में बंद सिलेंडर के भीतर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि परिसर में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित सिलेंडर स्टोरेज, आपातकालीन निकासी और अन्य फायर सेफ्टी प्रबंध निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
पुलिस की कार्रवाई के बाद ही क्यों जागता है फूड सेफ्टी विभाग?
जीरकपुर में खाद्य और पेय पदार्थ तैयार करने वाली इकाइयों पर समय-समय पर पुलिस कार्रवाई के बाद फूड सेफ्टी विभाग के मौके पर पहुंचने से नियमित निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि ऐसी इकाइयां लगातार उत्पादन और सप्लाई कर रही हैं तो उनका नियमित निरीक्षण कितनी बार किया जाता है और रिकॉर्ड की जांच किस स्तर पर होती है, यह भी अहम सवाल है। हालांकि मौजूदा मामले में किसी नियम उल्लंघन को अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता। इसका फैसला लैब रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद ही होगा