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लुधियाना की सड़कें बन रही कूड़े का ढेर, 11000 सफाई कर्मी, करोड़ों के टेंडर, फिर भी चारों तरफ फैली गंदगी - Uturn Time
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शहर में सफाई कर्मियों और सेनेटरी इंस्पेक्टरों का गैंग एक्टिव चर्चा, पूर्व कमिश्नर व अधिकारी 97 करोड़ के कूड़ा सेग्रीगेट टेंडरों में कर गए बड़ा खेल लुधियाना/यूटर्न/15 फरवरी। एक समय था, जब लुधियाना को स्मार्ट सिटी के तौर पर जाना जाता था। लेकिन अब वहीं स्मार्ट सिटी धीरे-धीरे कूड़े के ढेर में तबदील होती जा रही है। दरअसल, सफाई कर्मियों द्वारा शहर की किसी भी सड़क पर मनमर्जी से कहीं भी कूड़ा फेंकना शुरु कर दिया जाता है। नतीजाजनक अब शायद ही ऐसी रोड होगी, जहां राहगीरों को कूड़े का ढेर न मिले। ताजा मामला प्रताप चौक के नजदीक का सामने आया है। जहां पर संगीत सिनेमा के सामने सड़क पर कूड़े का ढेर लगाना शुरु कर दिया है। जिससे वहां इतनी बदबू आती है कि राहगीरों को गुजरना भी मुश्किल हो रहा है। मगर नगर निगम अधिकारियों द्वारा इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहीं शहर में 6000 पक्के व 5000 कच्चे करीब 11000 हजार सफाई कर्मी है। भारी मात्रा में मशीनरीं है। जबकि करोड़ों रुपए के कूड़े के टेंडर दिए गए हैं। लेकिन फिर भी शहर की ऐसी दशा बड़े सवाल खड़े कर रही है। वहीं चर्चा है कि कूड़ा सेग्रीगेट के 97 करोड़ के दो टेंडरों में दो पूर्व कमिश्नरों, अधिकारियों और ठेकेदारों द्वारा मिलकर करोड़ों रुपए का खेल किया गया है। जिसके चलते दिखावे के लिए तो कूड़ा लिफ्टिंग-सेग्रीगेशन प्रोसेस सही से चल रहा है, लेकिन असलियत में जमीनीं हकीकत कुछ और बयां कर रही है। कूड़ा बीनने के लिए दिए जा रहे ठेके चर्चा है कि शहर में सफाई कर्मियों और सेनेटरी इंस्पेक्टरों का गैंग एक्टिव है। उनकी तरफ से घरों से कूड़ा उठाकर अलग अलग जगह ढेर लगा दिए जाते हैं। जिसके बाद कूड़ा बीनने के लिए ठेका दे दिया जाता है। कूड़े में से प्लास्टिक बोतलें, लिफाफे व अन्य जरुरी चीजें निकालकर अलग से बेची जाती है। जिसकी एवज में सफाई कर्मी और सेनेटरी इंस्पेक्टर मोटी कमाई कर रहे हैं। प्रताप चौंक पर कांपेक्टर, फिर भी यह हालात प्रताप चौंक के पास कांपेक्टर लगा हुआ है। लेकिन फिर भी चौंक के आसपास कूड़े के ढेर लगे हैं। पहले प्रताप चौंक से गिल चौक की तरफ जाने वाली सड़क पर कूड़े के ढेर लगाए गए। यूटर्न अखबार द्वारा खबरें प्रकाशित करने के बाद वे ढेर हटाए गए। फिर चौंक के पास पार्क में ढेर लगने शुरु हो गए। बता दें कि कांपेक्टरों से कूड़ा लिफ्टिंग का काम प्यारा सिंह कंपनी के पास है। जिसका काम पूरे शहर के कांपेक्टरों से कूड़ा उठाकर टिब्बा रोड डंप पर फेंकना है। जिसके लिए उसे 300 रुपए टन मिलते हैं। चर्चा है कि कंपनी द्वारा समय पर कांपेक्टर से कूड़ा न उठाना भी एक अहम कारण है। कूड़ा सेग्रीगेट टेंडर में हुआ बड़ा घोटाला निगम द्वारा जून 2022 में दो टेंडर लगाए गए। जिसमें टिब्बा रोड डंप से 5 लाख टन सुक्खा कूड़ा सेग्रीगेशन के लिए महाराष्ट्र के लातूर की सागर मोटर्स फर्म को 27 करोड़ का डेढ़ साल के लिए ठेका दिया। जबकि गीले व ताजा कूड़े का ठेका ग्रीनटेक कंपनी को मिला। तब निगम कमिश्नर संदीप ऋषि और पूर्व एसई संजय कंवर की अगुवाई में यह ठेके दिए गए। चर्चा है कि सागर मोटर्स द्वारा पहले तो बिजली न आने समेत कई बहाने बनाकर साल 2024 की शुरुआत में काम शुरु किया। फिर फर्म द्वारा 60 प्रतिशत सुक्खा कूड़ा डंप से उठाया गया, जबकि बाकी 40 प्रतिशत कूड़ा उठाने के जाली बिल बनवाकर निगम से पूरी पेमेंट ले ली। चर्चा है कि इस घोटाले में पूर्व कमिश्नर और एसई को मोटी रिश्वत दी गई। शोर पड़ने पर नया टेंडर कर दिया अलॉट निगम अफसरों का कूड़ा घोटाला यहीं नहीं रुका। 2022 में महाराष्ट्र के लातूर की सागर मोटर्स फर्म को दिए टेंडर में 40 प्रतिशत हेरफेर होने पर मामला काफी विवादों में पड़ा। इस बीच आईएएस संदीप ऋषि का तबादला हो गया और आदित्य डेचलवाल ने कमिश्नर का चार्ज संभाला। हेरफेर का मामला दबाने के लिए पूर्व एसई संजय कंवर ने निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल के साथ मिलकर 2025 में 19 लाख टन सुक्खा कूड़ा सेग्रीगेट करने के लिए 70 करोड़ का एक और टेंडर लगा दिया। यह टेंडर भी सागर मोटर्स को दिया। दोनों अधिकारियों पर बहती गंगा में हाथ धोने के आरोप हैं। काम पूरा किए बिना निगम से पूरी पेमेंट हड़प ली चर्चा है कि निगम में सागर मोटर्स द्वारा पुराने टेंडर का काम पूरा किए बिना नया टेंडर अलॉट करने पर विवाद हो गया। पूर्व कमिश्नर आदित्य डेचलवाल और एसई संजय कंवर से सवाल होने लगे। ऐसे में 40 प्रतिशत कूड़ा सेग्रीगेट न करने और जाली बिल बनाकर निगम से पूरी पेमेंट लेने का घोटाला उजागर होने का डर सताने लगा। जिसके बाद ठेकेदार ने अधिकारियों के साथ मिलकर पुराने टेंडर का 40 प्रतिशत सेग्रीगेट नहीं किए कूड़े को उठाकर नए 19 लाख टन कूड़े के ढेर में गिरा दिया। जबकि दस्तावेजों में पुरानी जगह साफ दिखा दी गई। चर्चा है कि दूसरे टेंडर में भी बड़ी मात्रा में अधिकारियों को कमीशन दी गई थी। क्या मंत्री संजीव अरोड़ा शहर को बना सकेगें कूड़ा मुक्त वहीं अब सभी की नजरें मंत्री संजीव अरोड़ा पर टीकी हैं। मौजूदा समय में संजीव अरोड़ा लोकल बॉडी विभाग के भी मंत्री है। ऐसे में अब देखना होगा कि क्या वह शहर को कूड़ा मुक्त कर फिर से स्मार्ट सिटी बना सकेगें या नहीं। वहीं कूड़ा टेंडरों में चल रहे अधिकारियों और ठेकेदारों के घोटालों को रोक सकेगें या नहीं। ---