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हरियाणा/यूटर्न/ 24 मार्च।सीएम सिटी कुरुक्षेत्र स्थित एलएनजेपी अस्पताल की हालत इन दिनों गंभीर चिंताओं का विषय बनी हुई है। यहां एक ओर मरीज लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर दवाइयों का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दवा वितरण करने वाला स्टाफ ही नदारद नजर आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि इलाज देने वाला अस्पताल खुद ही “बीमार” दिखाई दे रहा है। मौके पर मिली जानकारी के अनुसार, दवाइयां बांटने के लिए केवल एक कर्मचारी ही ड्यूटी पर मौजूद है, जबकि अन्य स्टाफ या तो ट्रांसफर हो चुका है या छुट्टी पर है। ऐसे में सैकड़ों मरीजों का भार एक ही कर्मचारी पर पड़ रहा है, जिससे व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कुछ दिन पहले ही अस्पताल में बिजली और पानी की समस्या ने मरीजों को परेशान किया था, और अब दवाइयों के काउंटर पर अव्यवस्था ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, लेकिन न समय पर दवाइयां मिल रही हैं और न ही संतोषजनक व्यवहार। मरीजों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “यह सरकारी अस्पताल खुद ही बीमार है, हमें क्या इलाज देगा? न सही व्यवहार मिलता है और न ही समय पर दवाइयां।” स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कानून भी स्पष्ट है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार सुनिश्चित किया गया है, जिसमें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी शामिल हैं। ऐसे में अस्पतालों में स्टाफ की कमी और लापरवाही सीधे तौर पर इस अधिकार पर सवाल खड़े करती है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर दवाइयां न मिलने से मरीजों की स्थिति गंभीर हो सकती है, खासकर शुगर, बीपी, हृदय रोग और संक्रमण से ग्रसित मरीजों के लिए यह स्थिति जोखिम भरी साबित हो सकती है। साथ ही भीड़ और अव्यवस्था से संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। इस मामले में जब संबंधित अधिकारी सारा अग्रवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि एक कर्मचारी का ट्रांसफर लाडवा हो चुका है, दो कर्मचारी मेडिकल लीव पर हैं और दो अन्य छुट्टी पर हैं, जिसके चलते फिलहाल एक ही कर्मचारी पूरे मेडिसिन काउंटर का कार्य संभाल रहा है। वहीं, सिविल सर्जन सीएमओ का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। कई बार फोन कॉल और अन्य माध्यमों से संपर्क करने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।