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कई लोगों के लिए चलना एक सामान्य बात है, लेकिन कुछ लोगों के लिए दो कदम चलना भी रोज़ की जंग बन जाता है। पंजाब में अब यह जंग धीरे-धीरे राहत में बदल रही है, क्योंकि घुटनों के दर्द से पीड़ित हजारों मरीज भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत जीवन बदल देने वाली सर्जरी करवा रहे हैं। यह योजना आधुनिक इलाज को मुफ्त और व्यापक रूप से उपलब्ध बना रही है। उम्रदराज़ सुखविंदर कौर के लिए यह इलाज तुरंत राहत लेकर आया। उन्होंने कहा, “दो-तीन साल से मेरे घुटनों में दर्द था। कुछ दिन तो मैं चल भी नहीं पाती थी। अब सर्जरी के बाद मैं बहुत खुश हूं। स्वास्थ्य कार्ड ने मुझे मेरी ज़िंदगी वापस दे दी है। अब मैं बिना दर्द के चल सकूंगी।” 67 वर्षीय परमजीत कौर के लिए कुछ समय पहले तक चलना लगभग असंभव हो गया था। एक कमरे से दूसरे कमरे तक जाना भी दर्दनाक था और कुछ मिनट खड़े रहना भी मुश्किल था। लगभग एक साल तक उनकी ज़िंदगी सीमित चलने-फिरने और दर्द में बीती, जिसका मुख्य कारण ऑस्टियोआर्थराइटिस था। उनकी ज़िंदगी में बदलाव तब आया जब उनके बेटे जसविंदर सिंह को सोशल मीडिया के जरिए इस योजना के बारे में पता चला। उन्होंने बताया, “मुझे मुख्यमंत्री सेहत योजना के बारे में ऑनलाइन जानकारी मिली। मैंने कुछ ही दिनों में दस्तावेज तैयार किए। रजिस्ट्रेशन के बाद सर्जरी हो गई। डॉक्टर बहुत सहयोगी थे और अब मेरी माता जी काफी बेहतर महसूस कर रही हैं।” आज परमजीत कौर उन हजारों लोगों में शामिल हैं, जिन्हें घुटना प्रत्यारोपण के मुफ्त इलाज के जरिए फिर से चलने-फिरने की आज़ादी मिली है। सिर्फ तीन महीनों में, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत लगभग 4,600 घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की जा चुकी हैं। यह उन मरीजों की बढ़ती संख्या को दर्शाता है, जो पहले महंगे इलाज के कारण सर्जरी टालते रहते थे। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। बरनाला सिविल अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. करन चोपड़ा ने कहा, “हम घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण के मामलों में तेजी देख रहे हैं। ज्यादातर मरीज ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित होते हैं, जो कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाता है और जकड़न व तेज दर्द पैदा करता है।” उन्होंने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी में खराब हो चुके जोड़ को धातु और प्लास्टिक के हिस्सों से बदला जाता है, जिससे चलने-फिरने में सुधार आता है और दर्द कम होता है। उन्होंने कहा, “पहले हम महीने में लगभग 80 सर्जरी करते थे, अब यह संख्या 120 से 130 तक पहुंच गई है।” इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण है—इलाज का सस्ता और आसानी से उपलब्ध होना। पहले एक घुटना बदलने की लागत 50,000 से 1 लाख रुपये तक होती थी, जिसके कारण लोग वर्षों तक सर्जरी टालते रहते थे। डॉ. चोपड़ा ने कहा, “पहले लोग खर्च के कारण हिचकिचाते थे। अब आधार, वोटर आईडी और स्वास्थ्य कार्ड के जरिए इलाज पूरी तरह कैशलेस है। मरीजों को कोई भुगतान नहीं करना पड़ता।” ऐसी कहानियां पूरे पंजाब से सामने आ रही हैं। बठिंडा में रणधीर सिंह ने ‘एम्स’ में सर्जरी करवाई, जबकि तरनतारन में राजविंदर कौर का इलाज इसी योजना के तहत जिला अस्पताल में हुआ। उनके परिवारों का कहना है कि इस आर्थिक राहत ने उन्हें बिना किसी झिझक के इलाज कराने में मदद की। राजविंदर की बेटी सहजप्रीत ने कहा, “मेरी माता जी बहुत दर्द में थीं और घर का काम भी नहीं कर पाती थीं। स्वास्थ्य कार्ड की वजह से हमें खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ी। इस योजना के लिए हम सरकार के आभारी हैं।” पंजाब में जो बदलाव दिखाई दे रहा है, वह केवल सर्जरी की संख्या में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि दर्द के प्रति सोच में बदलाव है—जहां अब खर्च के कारण इलाज टाला नहीं जाता और चलने-फिरने की आज़ादी अब दूर नहीं रही। अस्पतालों में अब लाचारी की आवाज़ों की जगह फिर से चलते कदमों की आहट सुनाई देने लगी है।