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श्रीनगर/कश्मीर 09 Jan : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च 2026 को इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन – जम्मू एवं कश्मीर चैप्टर (IHRO) कश्मीर की ऐतिहासिक धरती पर इस वैश्विक दिवस को पूरे गौरव के साथ मनाएगा। इस अवसर पर संगठन महिलाओं के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएगा। इस विशेष कार्यक्रम में कश्मीर डिवीजन की विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 100 महिलाओं को ‘हौसला अफज़ाई (प्रोत्साहन) पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। इन्हीं विशिष्ट महिलाओं में से एक हैं नसीरा अख्तर, जिन्हें आईएचआरओ द्वारा सम्मानित किया जाना संगठन के लिए भी गर्व की बात है। पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनीं नसीरा अख्तर 1 फरवरी 1972 को कुलगाम, जम्मू-कश्मीर में जन्मी नसीरा अख्तर एक प्रख्यात भारतीय आविष्कारक हैं, जिनकी जीवन यात्रा संघर्ष, नवाचार और पर्यावरणीय चेतना की प्रेरक मिसाल है। औपचारिक उच्च शिक्षा के अभाव और प्रारंभिक स्तर पर पढ़ाई छोड़ने के बावजूद उन्होंने अपने आत्मविश्वास, जिज्ञासा और पारंपरिक ज्ञान के बल पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई। नसीरा अख्तर को बचपन से ही जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक उपचारों में गहरी रुचि रही। इसी रुचि ने उन्हें कश्मीर विश्वविद्यालय के साइंस एंड इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर में आठ वर्षों से अधिक समय तक शोध कार्य के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने दुनिया की सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं में से एक—पॉलीथीन प्रदूषण—पर काम किया। वर्ष 2008 में उन्होंने एक ऐसी प्राकृतिक तकनीक विकसित की, जिससे पॉलीथीन को जैविक रूप से नष्ट किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में एक विशेष जड़ी-बूटी से तैयार पेस्ट को पॉलीथीन पर लगाया जाता है, जिससे उसे जलाने पर किसी प्रकार का पर्यावरणीय प्रदूषण नहीं होता। यह नवाचार वैश्विक प्लास्टिक संकट के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नसीरा अख्तर ने अपने इस शोध को केवल निजी लाभ तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कश्मीर विश्वविद्यालय से लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक साझा किया, जहां उन्हें आधिकारिक रूप से इस खोज का आविष्कारक माना गया। उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना मिली है। वर्ष 2022 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ अवॉर्ड्स, कलाम्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स सहित कई प्रतिष्ठित मंचों से सम्मान प्राप्त हुआ। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) ने भी उनके कार्य की वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्ता को स्वीकार किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके शोध को एक ऑस्ट्रेलियाई जर्नल में प्रकाशित किया गया है और उनकी रिसर्च फाइलें कई देशों के विशेषज्ञों के साथ साझा की गई हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके। इतनी उपलब्धियों के बावजूद नसीरा अख्तर का मानना है कि उनका मिशन तब तक अधूरा है, जब तक इस तकनीक का बड़े स्तर पर व्यावसायीकरण और क्रियान्वयन नहीं हो जाता। उनके लिए असली सफलता पुरस्कार नहीं, बल्कि स्वच्छ पर्यावरण और पॉलीथीन प्रदूषण से मुक्त दुनिया है। आईएचआरओ जम्मू-कश्मीर चैप्टर ने इस अवसर पर महिलाओं के अधिकारों, नेतृत्व और सशक्त समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नसीरा अख्तर जैसी महिलाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।