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Ludhiana: पंजाब सरकार का जेलों में स्वास्थ्य और पुनर्वास पर फोकस, नशा व एचआईवी पर उच्चस्तरीय मंथन - Uturn Time
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लुधियाना में यूएनओडीसी, पंजाब जेल विभाग और टीवाईसीआईए के संयुक्त कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कैदियों के स्वास्थ्य, नशामुक्ति और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत बनाने पर की चर्चा
लुधियाना (Narendra Singh Danu) : जेलों में बंद कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और प्रभावी पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने शुक्रवार को लुधियाना में ‘नशा, एचआईवी और जेलों में कैदियों का स्वास्थ्य’ विषय पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी) ने पंजाब जेल विभाग तथा गैर-सरकारी संस्था ‘टर्न योर कंसर्न इंटू एक्शन’ (टीवाईसीआईए) के सहयोग से किया। एक दिवसीय बैठक में राज्य सरकार, जेल विभाग तथा पंजाब सहित देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैठक में जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं, नशामुक्ति उपचार और पुनर्वास सुविधाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के तहत नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार नशे की लत को अपराध के बजाय स्वास्थ्य संबंधी समस्या मानकर उसका उपचार कर रही है। पिछले एक वर्ष और तीन महीनों में 10,000 से अधिक नशा पीड़ितों को जेल भेजने के बजाय नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा 25,000 कैदियों की हेपेटाइटिस, एचआईवी तथा नशे से संबंधित जांच करवाई गई है। उन्होंने कहा कि जेलें केवल सुधार गृह नहीं, बल्कि उपचार, पुनर्वास और स्वस्थ जीवन की ओर वापसी के केंद्र भी बननी चाहिए। पंजाब की जेलों में संचालित ओओएटी क्लीनिक, आईटीआई कौशल विकास पाठ्यक्रम, मनोचिकित्सक और काउंसलर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि पंजाब एनडीपीएस अधिनियम के तहत दोषसिद्धि के मामलों में देश में अग्रणी है और अब सुधारात्मक न्याय के क्षेत्र में भी उदाहरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के लिए समाज से नशे का खात्मा और प्रत्येक नशा पीड़ित तक उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना समान रूप से महत्वपूर्ण है। बैठक के दौरान आईजी जेल एवं आईएएस अधिकारी मुहम्मद तैयब ने जेलों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विशेष प्रस्तुति दी। विभिन्न तकनीकी सत्रों में नशा और संक्रामक रोगों की रोकथाम, महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं, दिव्यांग कैदियों की देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। यूएनओडीसी के विशेषज्ञों ने जेल स्वास्थ्य एवं पुनर्वास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है। उन्होंने जोर दिया कि कैदियों को जेल में रहने के दौरान और रिहाई के बाद भी उपचार एवं मनोसामाजिक सहायता की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। दक्षिण एशिया के लिए यूएनओडीसी क्षेत्रीय कार्यालय की आपराधिक न्याय विशेषज्ञ सीमा जोशी ने कहा कि इस वर्ष की थीम ‘वर्ल्ड ड्रग प्रॉब्लम: पर्सिस्टिंग इश्यूज़, न्यू चैलेंजेज़, इनोवेटिव रिस्पॉन्सेज़’ बदलती चुनौतियों के अनुरूप नए और प्रभावी समाधान विकसित करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं, नशामुक्ति उपचार और एचआईवी सेवाओं को मजबूत करना न केवल कैदियों के पुनर्वास बल्कि सुरक्षित और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। बैठक में स्क्रीनिंग प्रणाली, ओपिओइड आधारित उपचार, नशा मुक्ति के दौरान चिकित्सा सहायता, मानसिक एवं सामाजिक सहयोग तथा उपचार की निरंतरता जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही नशा और एचआईवी संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षणिक उपकरण प्रस्तुत किए गए। महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और रिहाई के बाद भी उपचार एवं देखभाल सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के अंत में सभी विभागों और विशेषज्ञों ने जेलों में नशे की समस्या से निपटने के लिए मानवाधिकार आधारित, समावेशी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने तथा संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।