Uturn Time
Breaking
Chandigarh: भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण वर्ग चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न पश्चिम बंगाल में जनादेश 2026- सत्ता का नया सवेरा -9 मई 2026 रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती: नई सरकार का शपथ ग्रहण -कई गंभीर चुनौतियां Testing Agin Zirakpur: तेज आंधी ने बढ़ाया खतरा, हाईवे पर उड़ती शीट से हड़कंप Zirakpur: बलटाना में लगातार वारदातें, बुजुर्ग से छीनी सोने की चेन zirakpur: युवक-युवती और दुकानदार में झड़प, शिवालिक विहार में माहौल तनावपूर्ण Chandigarh: कारोबारियों के लिए राहत, राइट टू बिजनेस मॉडल पर काम शुरू Chandigarh: चंडीगढ़ घटना पर कानूनी जंग तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूटी प्रशासन Ghaziabad: लुधियाना से CS हरदीप सिंह ने गाज़ियाबाद कार्यशाला में लिया भाग Chandigarh: मान सरकार पर हमले तेज, जाखड़ ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात Panchkula: वार्ड-7 बना चुनावी हॉटस्पॉट, प्रेम कुमार ने झोंकी पूरी ताकत Panchkula: तीन शहरों के लिए जीवनदान, पंचकूला में बना ग्रीन कॉरिडोर
Logo
Uturn Time
एक साल का मेयर, पाँच साल की जंग: चंडीगढ़ में सत्ता बनाम लोकतंत्र चंडीगढ़। चंडीगढ़ की नगर राजनीति को झकझोरते हुए सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में एक अहम प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है, जिसने केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों और प्रशासनिक नियंत्रण की नई बहस छेड़ दी है। बिल में सीधे चुने गए मेयर का पाँच साल का निश्चित कार्यकाल और यूटी एडमिनिस्ट्रेटर से चुनी हुई नगर निगम को प्रशासनिक शक्तियों के हस्तांतरण की मांग की गई है। ‘पंजाब म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन लॉ (एक्सटेंशन टू चंडीगढ़) अमेंडमेंट बिल, 2025’ मौजूदा एक साल के मेयर सिस्टम को समाप्त करने का प्रस्ताव करता है, जिसे तिवारी ने अस्थिरता, राजनीतिक सौदेबाज़ी और विकास कार्यों में बाधा का कारण बताया। प्रस्तावित कानून के तहत मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव सीधे जनता करेगी और वे पूरे निगम कार्यकाल तक पद पर रहेंगे। बिल प्रशासनिक ढांचे में भी बड़ा बदलाव सुझाता है—मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली, अधिकारियों पर निर्वाचित नेतृत्व का नियंत्रण और दलबदल विरोधी प्रावधान। हालांकि केंद्र सरकार की सहमति के बिना यह बिल संसद में लंबित है। बीजेपी का विरोध चंडीगढ़ में प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर होने की आशंका से जुड़ा है। यह बिल भले ही कानून न बना हो, लेकिन इसने चंडीगढ़ में सवाल खड़ा कर दिया है—सत्ता प्रशासन के पास रहे या जनता के चुने प्रतिनिधियों के पास?