लुधियाना/यूटर्न/25 जुलाई। गुरु नानक स्टेडियम में 14.38 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए बास्केटबॉल हॉल का एक साल पूरा होने से पहले छत से पानी टपकने लगा। वहीं फ्लोरिंग को उखाड़कर दोबारा लगाया जा रहा है। इस मामले में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू द्वारा पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार की लापरवाही के कारण आज युवाओं और प्लेयर्स का भविषय खराब हो रहा है। उनके साथ धोखा किया गया है। जिसके लिए पंजाब की जनता कभी भी सरकार को माफ नहीं करेगी। दूसरी तरफ इस मामले के तूल पकड़ने पर कमीशन लेने वाले दो अफसरों को हाथ पांव की पड़ चुकी है। उनकी और से खुद को बचाने के चक्कर में अब फ्लोरिंग का काम तेज रफ्तार से कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि काम जल्द खत्म हो और मामला शांत हो सके। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में अभी तक नगर निगम कमिश्नर ओजस्वीं द्वारा न तो कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया और न ही ठेकेदार व जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की गई है।
यूटर्न द्वारा मुद्दा उठाने के बाद बिट्टू ने लिया संज्ञान
जानकारी के अनुसार यूटर्न टाइम अखबार द्वारा बास्केटबॉल हॉल में हुए घोटाले को प्रमुख्ता से प्रकाशित कर सच्चाई सामने लाई गई। जिसके बाद पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत बिट्टू द्वारा मामले में संज्ञान लिया गया। बिट्टू ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट सांझी करते लिखा गया कि यह बेहद शर्मनाक है कि लगभग 14.38 करोड़ की लागत से बने लुधियाना के गुरु नानक स्टेडियम का बास्केटबॉल कोर्ट आज पंजाब सरकार की अनदेखी के आंसू रो रहा है। हमारे होनहार युवा खिलाड़ी, जो पूरे उत्तर भारत से देश का नाम रोशन करने के सपने लेकर आते हैं, उन्हें बारिश के दिनों में टपकती छत के नीचे खेलने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह सिर्फ एक इमारत की खराब हालत नहीं है, बल्कि पंजाब के युवाओं और खिलाड़ियों के साथ बड़ा धोखा है।
साढ़े 13 प्रतिशत कमीशन का हुआ खेल
चर्चा है कि इस बास्केटबॉल हॉल का टेंडर जनवरी 2023 में अलॉट हुआ था। पहले टेंडर 11.26 करोड़ का था। जिसे जुलाई 2023 तक पूरा करना था। इसमें पूर्व एसई द्वारा साढ़े आठ प्रतिशत और एक उच्च अधिकारी कम नेता द्वारा पांच प्रतिशत कमीशन ली गई। ज्यादा कमीशन बांटने के कारण ठेकेदार को मुनाफा नहीं हुआ। अफसरों ने ठेकेदार की भरपाई कराने को टेंडर की लागत बढ़ाकर 14.38 करोड़ कर दी। हालांकि उसमें कारण डिजाइन में बदलाव, अमेरिकन मैपल वुड लगाना और अतिरिक्त कार्यों को बताया गया। बार-बार हुई देरी के कारण यह परियोजना आखिरकार साल 2025 में पूरी हुई।