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राखीगढ़ी के टीला नंबर एक तथा तीन का गहन अवलोकन किया, सभी विकास एवं संरक्षण कार्य तीव्र गति से पूरे करने के दिए निर्देश चंडीगढ़, 26 दिसंबर - राखीगढ़ी संग्रहालय में पुरानी सभ्यताओं के जीवन के तौर-तरीकों को मल्टीमीडिया तकनीक के माध्यम से जीवंत किया जाएगा, जिससे आगंतुकों को एक अनूठा अनुभव मिल सके। इस संबंध में म्यूजियम में भविष्य की योजनाओं को लेकर विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त व सचिव डा. अमित अग्रवाल की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी को वैश्विक पटल पर लाने दिशा में केंद्र व हरियाणा सरकार ने व्यापक परियोजना तैयार की है। इस परियोजना में वर्चुअल रियलिटी और 3डी प्रोजेक्शन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। राखीगढ़ी म्यूजियम में सिंधु घाटी सभ्यता की लगभग 5,000 साल पुरानी हस्तकृतियाँ, जैसे मिट्टी के बर्तन, आभूषण, औज़ार, टेराकोटा वस्तुएं, शंख और तांबे के औजार, मुहरें, मानव कंकाल और दैनिक जीवन की वस्तुएं स्थापित की जाएंगी, साथ ही बच्चों के लिए एक विशेष किड्स ज़ोन, ओपन-एयर थिएटर, लाइब्रेरी, कैफे, हॉस्टल और टूरिस्ट फैसिलिटीज़ भी बनाए जा रहे हैं ताकि इसे विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाया जा सके, जहाँ इतिहास को मनोरंजक तरीके से दिखाया जा सके। हड़प्पा सभ्यता के इतिहास की झलक दिखाने के लिए फोटो लैब तथा बच्चों को खेल-खेल में इतिहास से जोड़ने के लिए एक अनूठा किड्स ज़ोन बनाया जा रहा है। इसी प्रकार से इतिहास और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों के लिए ओपन-एयर थिएटर, युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने के लिए आधुनिक लाइब्रेरी, कैफे, हॉस्टल और विश्राम गृह, कलाकृतियों और स्थल के बीच संबंध समझाने के लिए नई तकनीकों का प्रयोग किया जाएगा ताकि राखीगढ़ी को एक विश्वस्तरीय पुरातत्व और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करते हुए पर्यटकों व शोधकर्ताओं को आकर्षित किया जा सकें। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। बैठक के उपरांत डा. अमित अग्रवाल ने विश्व प्रसिद्ध राखीगढ़ी स्थित पुरातत्व विभाग की विभिन्न साइटों का दौरा किया। उन्होंने राखीगढ़ी के टीला नंबर एक तथा टीला नंबर तीन का गहन अवलोकन किया और खुदाई के दौरान प्राप्त हड़प्पा कालीन कच्ची एवं पक्की ईंटों, कच्चे मकानों के अवशेषों तथा अन्य महत्वपूर्ण पुरावशेषों को नजदीक से देखा। आयुक्त एवं सचिव ने टीला नंबर एक पर स्थित अस्थाई संग्रहालय का भी दौरा किया। यहां उन्होंने खुदाई में प्राप्त विभिन्न वस्तुओं का अवलोकन किया तथा इनके संरक्षण, प्रदर्शन और पर्यटकों के लिए बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने को लेकर अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। आयुक्त एवं सचिव डॉ अमित अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित कार्यों को गति प्रदान की जाए तथा सभी विकास एवं संरक्षण कार्य आपसी समन्वय से समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। इस अवसर पर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने अवगत करवाया कि टीला नंबर एक स्थित पुरातात्विक साइट पर शेड के निर्माण को लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया है, ताकि खुदाई क्षेत्र को विपरित मौसम परिस्थितियों से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि टीला नंबर तीन पर पहले से बनाए गए शेड का विस्तार किए जाने का प्रस्ताव है, जिससे वहां मौजूद पुरावशेषों का संरक्षण और बेहतर ढंग से किया जा सकेगा। इस अवसर पर विभाग के निदेशक अमित खत्री, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।