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कही 25% कमीशन, तो कहीं अटके टेंडर और 30 मार्च की डेडलाइन से पहले घोटाले की बू लुधियाना, 15 फरवरी। केंद्र सरकार द्वारा पंजाब को स्पेशल असिस्टेंस योजना के तहत आवंटित 1000 करोड़ रुपये के फंड को लेकर नगर निगम और इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इस राशि में राज्य सरकार के खाते में पड़े 300 करोड़ रुपये बेकार हो रहे हैं, जबकि बकाया 700 करोड़ की राशि पहली किश्त की उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) भेजे जाने के बाद ही जारी होगी। जानकारी के अनुसार, जारी की गई 300 करोड़ रुपये की राशि को 30 मार्च तक खर्च कर कार्य पूर्ण करना अनिवार्य है। निर्धारित समय सीमा तक कार्य पूरा न होने की स्थिति में राशि केंद्र सरकार को वापस लौट जाएगी है, जिससे राज्य को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है। इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के 20 करोड़ के टेंडरों में 25 प्रतिशत किसके ! लोकल बॉडी मंत्री संजीव अरोड़ा द्वारा विकास कार्यों को रफ़्तार देने के निर्देशों लागु करते हुए इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में लगभग 20 करोड़ रुपये के टेंडर लगाए गए। रफ़्तार की जल्दबाजी या आँख मिचोली में एक ही जैसा वर्क अलग अलग ठेकेदार को 2 और २७ % प्रतिशत कम दर (लेस) पर आवंटित कर दिया गया । जिससे चर्चाएं गर्म है की 2 % पर अलाट किए टेंडर की करीब 25 प्रतिशत राशि कथित रूप से किन किन अधिकारियों और राजनेताओं के बीच बांटी गई हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वर्क आर्डर के इंतजार में निगम के 135 करोड़ के टेंडर ! नगर निगम में लगभग 135 करोड़ रुपये के टेंडर लगाए गए हैं। इनमें से 14 टेंडर खोले जा चुके हैं, जिनमें ठेकेदारों ने 4 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक कम दर (लेस) दी है। इसके बावजूद 11 टेंडरों के वर्क ऑर्डर फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी में लंबित बताए जा रहे हैं, जबकि 6 टेंडर ठेकेदारों के आपसी विवाद के कारण अटके हुए हैं। टाइम-बाउंड प्रोजेक्ट होने के कारण देरी से काम शुरू होने पर समय सीमा में कार्य पूर्ण करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल लुधियाना से कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया में देरी और आरोपों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इसी बीच कई सत्ताधरी राजनेताओं पर पैसे लेने के आरोपों की चर्चा ने मामले को और तूल दे दिया है। हालांकि इन आरोपों की जांच या पुष्टि संबंधी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अगली किश्त पर टिकी नजर स्पेशल असिस्टेंस फंड की अगली किश्त जारी होने से पहले 300 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग और उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजना अनिवार्य है। यदि समय पर खर्च और रिपोर्टिंग नहीं हुई, तो अगली किश्त अटक सकती है। फिलहाल संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला बड़े वित्तीय अनियमितता के रूप में उभर सकता है।