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उत्तर प्रदेश/यूटर्न/31 मार्च।उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िले से एक अनोखी घटना सामने आई है। जोगेश नाम का एक व्यक्ति 9 किलोमीटर की 'दंडवत यात्रा' करने के लिए वायरल हो गया है। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जिसमें बार-बार पूरे शरीर से ज़मीन पर लेटकर प्रणाम किया जाता है। जोगेश ने यह यात्रा अपनी शादी बचाने के लिए नहीं, बल्कि शादी खत्म होने की खुशी में की है। यह यात्रा उसके गाँव से शुरू हुई और पूजनीय सिद्ध पीठ बैरवा समय माता मंदिर पर जाकर खत्म हुई। यह उस मन्नत का हिस्सा थी जो जोगेश ने अपनी निजी ज़िंदगी के एक बहुत ही मुश्किल दौर में मांगी थी। जोगेश ने बताया कि उसकी शादी 2022 में हुई थी और शादी के शुरुआती दिनों से ही उसके वैवाहिक जीवन में कलह शुरू हो गई थी। उसके अनुसार, उसने मंदिर में यह मन्नत मांगी थी कि अगर उसे तलाक़ मिल जाता है, तो वह आभार व्यक्त करने के लिए दंडवत यात्रा करेगा। उसका दावा है कि 2025 में उसकी यह इच्छा पूरी हो गई, जिसके बाद उसने अपना वादा निभाया। नारखोरिया का रहने वाला जोगेश दिल्ली में POP (प्लास्टर ऑफ़ पेरिस) इंटीरियर डिज़ाइन के क्षेत्र में काम करता है। उसने बताया कि शादी के बाद वह अपनी पत्नी को दिल्ली ले आया था, लेकिन उसकी कम आमदनी और काम के अनियमित घंटों को लेकर बार-बार होने वाले मतभेदों के कारण उनके बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे, जिससे उसे काफ़ी मानसिक तनाव झेलना पड़ा। इस अनुष्ठान को पूरा करने के लिए, जोगेश ने स्थानीय प्रशासन से अनुमति मांगी, क्योंकि ज़िले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 125 (पहले CrPC की धारा 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। भानपुर के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) हिमांशु कुमार ने यात्रा की अनुमति दे दी और सुरक्षा के ज़रूरी इंतज़ाम भी किए गए। शनिवार की सुबह तड़के, बिना कुछ खाए-पिए, जोगेश ने यह शारीरिक रूप से बेहद कठिन यात्रा शुरू की। वह लगातार ज़मीन पर लेटकर प्रणाम करते हुए, एक-एक कदम आगे बढ़ता रहा। उसके माता-पिता और गाँव के कई लोग भी उसके साथ थे, जो रास्ते भर उसका हौसला बढ़ाते रहे और भक्ति भरे नारे लगाते रहे। शाम तक, जब वह लगभग नौ किलोमीटर की दूरी तय करके मंदिर पहुँचा, तो यात्रा की थकान उसके चेहरे पर साफ़ झलक रही थी। वह साफ़ तौर पर थका हुआ लग रहा था, उसके घुटनों पर चोट के निशान थे, फिर भी उस मन्नत को पूरा करने के बाद वह भावनात्मक रूप से राहत महसूस कर रहा था, जो उसने कभी हताशा में मांगी थी। थाना प्रभारी महेश सिंह ने कहा, "यात्रा को सुरक्षित रूप से संपन्न कराने के लिए दो पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, जो 28 मार्च को पूरी हुई।" इस घटना का एक वीडियो तब से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कुछ लोगों ने सहानुभूति जताई है और इस रस्म को एक तरह की 'पर्सनल क्लोज़र' (निजी समापन) के तौर पर देखा है, वहीं दूसरों ने शादी के अंत को इतने नाटकीय और सार्वजनिक तरीके से दर्शाने के प्रतीकात्मक महत्व पर सवाल उठाए हैं।