कांग्रेस ने मणिपुर में जारी हिंसा और बड़े पैमाने पर विस्थापन को देखते हुए जनगणना प्रक्रिया तत्काल स्थगित करने की मांग की है। सांसद प्रो. ए. बिमोल अकोइजाम ने कहा कि हजारों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं और कई गांव व घर तबाह हो चुके हैं। उन्होंने केंद्र से एनआरसी और विदेशी नागरिक न्यायाधिकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग करते हुए आबादी संबंधी सवालों के निष्पक्ष समाधान पर जोर दिया।
नई दिल्ली (Naren Danu) : मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से जारी हिंसा और बड़े पैमाने पर विस्थापन के बीच कांग्रेस ने जनगणना प्रक्रिया को तत्काल स्थगित करने की मांग की है। इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद प्रो. ए. बिमोल अकोइजाम ने कहा कि जब हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित होकर राहत शिविरों में रह रहे हैं और बड़ी संख्या में मकान व गांव नष्ट हो चुके हैं, तब हाउस लिस्टिंग और जनगणना कराना व्यावहारिक भी नहीं है और प्रभावित लोगों के साथ न्याय भी नहीं होगा।
कांग्रेस कार्यालय में गुरुवार को पत्रकार वार्ता में अकोइजाम ने कहा कि 3 मई 2023 से जारी हिंसा के कारण करीब 60 हजार लोग अब भी बेघर हैं। इनमें बड़ी संख्या राहत शिविरों में रहने को मजबूर है। उन्होंने दावा किया कि संघर्ष के दौरान 10 हजार से अधिक मकान नष्ट हुए हैं और कई गांव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।
‘जनगणना रोकने नहीं, स्थगित करने की मांग’
कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि पार्टी जनगणना के खिलाफ नहीं है, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने के बजाय कुछ समय के लिए स्थगित करने की मांग कर रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रभावित गांवों के हजारों लोग अपने मूल घरों में मौजूद ही नहीं हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं, तो घरों की सही संख्या, स्थिति और निवासियों का वास्तविक रिकॉर्ड कैसे तैयार किया जा सकता है। उनके अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर विस्थापन के बीच सटीक हाउस लिस्टिंग कराना बेहद कठिन होगा।
अवैध प्रवासन का मुद्दा उठाया
अकोइजाम ने मणिपुर में कथित अवैध प्रवासन के मुद्दे को भी जनगणना से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश में पिछले कई दशकों के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासन के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई जनगणना शुरू करने से पहले आबादी से जुड़े पुराने और अनसुलझे सवालों पर स्पष्टता जरूरी है।
उन्होंने 2001 और 2011 की जनगणना के बाद मणिपुर की आबादी को लेकर उठे सवालों का उल्लेख करते हुए कुछ स्वतंत्र अध्ययनों का भी हवाला दिया। अकोइजाम के मुताबिक, बेंगलुरु की एक यूनिवर्सिटी और आईआईटी से जुड़े स्वतंत्र विद्वानों के अध्ययनों में राज्य की आबादी में हुई वृद्धि को सामान्य जनसांख्यिकीय कारणों से समझना मुश्किल बताया गया है।
एनआरसी और विदेशी नागरिक न्यायाधिकरण की मांग
कांग्रेस सांसद ने केंद्र और राज्य सरकार से मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया शुरू करने और विदेशी नागरिक न्यायाधिकरण गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे नागरिकता से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच और भारतीय नागरिकों तथा विदेशी नागरिकों की पहचान में मदद मिल सकती है।
उन्होंने म्यांमार के चिन राज्य की आबादी में कथित कमी और मणिपुर की आबादी में वृद्धि के बीच तुलना का भी उल्लेख किया और कहा कि इन परिस्थितियों की विस्तृत तथा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अकोइजाम ने कहा कि मणिपुर के लोग अवैध प्रवासन और विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए उचित, पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया चाहते हैं।