इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच पूरी हो गई है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले आयोग ने 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में सीलबंद लिफाफे में जमा की है। 25 अगस्त को संभावित सुनवाई में रिपोर्ट सार्वजनिक हो सकती है। इसमें दूषित पानी, 36 मौतों, प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों से जुड़े अहम निष्कर्ष सामने आने की उम्मीद है।
इंदौर (Naren Danu) : भागीरथपुरा के दूषित पानी कांड में करीब आठ महीने से चल रही जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय जांच आयोग ने 600 से अधिक पन्नों की अपनी रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में सीलबंद लिफाफे में सौंप दी है। अब सभी की निगाहें 25 अगस्त को संभावित सुनवाई पर टिकी हैं।
रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह क्या थी, 36 मौतों का पानी से कितना सीधा संबंध था और इस पूरी घटना के लिए प्रशासनिक स्तर पर किसकी जिम्मेदारी तय की गई है। हालांकि रिपोर्ट कब खोली जाएगी और उसकी प्रतियां पक्षकारों को कब उपलब्ध होंगी, इसका फैसला हाईकोर्ट करेगा।
पाइपलाइन से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक जांच
आयोग ने अपनी पड़ताल को केवल दूषित पानी के स्रोत तक सीमित नहीं रखा। इंदौर नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग समेत संबंधित विभागों से दस्तावेज जुटाए गए। प्रभावित लोगों के बयान लिए गए और घटना के दौरान उपचार, राहत तथा प्रशासनिक इंतजामों की भी समीक्षा की गई।
तत्कालीन निगम कमिश्नर दिलीप यादव, अपर आयुक्त टोहित सिसोनिया, कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव और स्थानीय पार्षद कमल वाघेला समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही। रिपोर्ट सीलबंद होने के कारण अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आयोग ने इनमें से किसी को जिम्मेदार ठहराया है या नहीं।
36 मौतों का कारण बनेगा रिपोर्ट का सबसे बड़ा आधार
भागीरथपुरा कांड में सैकड़ों लोग बीमार हुए थे और 36 लोगों की मौत ने पूरे देश का ध्यान इस ओर खींचा था। आयोग ने मेडिकल रिकॉर्ड, बीमारी के कारणों और उपलब्ध अन्य तथ्यों के आधार पर यह भी जांचा कि मृतकों की मौत का दूषित पानी से सीधा संबंध था या नहीं।
रिपोर्ट में इस संबंध में सामने आने वाला निष्कर्ष सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि दूषित पानी और मौतों के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित होता है तो प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे और जिम्मेदारी तय करने का रास्ता भी खुल सकता है।
27 जनवरी को बना था जांच आयोग
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने 27 जनवरी 2026 को जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था। आयोग को घटना के कारणों, मौतों, प्रभावित लोगों की स्थिति, प्रशासनिक इंतजामों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच का जिम्मा सौंपा गया था।
अब जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट अदालत के सामने है। घटना के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए थे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इंदौर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की थी। ऐसे में 25 अगस्त की संभावित सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने वाली अहम तारीख बन गई है।